– दिसंबर २०२७ नई डेडलाइन
सामना संवाददाता / मुंबई
हार्बर रेलवे मार्ग का बोरीवली स्टेशन तक विस्तार करने का प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण के जाल में फंस गया है। अतिरिक्त रेलवे ट्रैक के लिए जरूरी कांदिवली स्थित जमीन के अधिग्रहण का मुद्दा अब तक सुलझा नहीं है। इस कारण हार्बर का बोरीवली तक विस्तार दिसंबर २०२७ तक खिंच जाएगा। रेलवे ने यह डेडलाइन तय की है, लेकिन काम में और देरी हो सकती है, ऐसा मत रेलवे विशेषज्ञों ने व्यक्त किया है।
पश्चिम और हार्बर रेलवे की कनेक्टिविटी आसान करने के लिए हार्बर रेलवे मार्ग के विस्तारीकरण का काम हाथ में लिया गया। यह काम पश्चिम रेलवे के जरिए किया जा रहा है। कई सालों की प्रतीक्षा के बाद अंधेरी के आगे गोरेगांव तक हार्बर का विस्तार किया गया। उस समय उम्मीद थी कि एक-दो साल में बोरीवली तक हार्बर की लोकल ट्रेनें दौड़ेंगी, लेकिन मालाड और कांदिवली स्टेशनों के बीच ट्रैक के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इसी वजह से विस्तारीकरण का काम अटक कर फिलहाल मालाड तक ही पूरा हुआ है। कांदिवली-पूर्व की जमीन का अधिग्रहण बड़ा मुद्दा बना हुआ है, ऐसा पश्चिम रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। प्रोजेक्ट में प्रभावित होने वाले निवासियों से बातचीत जारी है। प्रभावितों से सफल बातचीत होने के बाद ही वास्तविक काम शुरू होगा। इस काम के लिए प्रशासन ने दिसंबर २०२७ का लक्ष्य रखा है, ऐसा संबंधित अधिकारी ने स्पष्ट किया, लेकिन अटके हुए भूमि अधिग्रहण और अब तक के धीमे कामकाज को देखते हुए बोरीवली तक विस्तार पूरा होने में कम से कम चार-पांच साल लगेंगे, ऐसा अनुमान रेलवे विशेषज्ञों ने जताया है।
सात साल से काम अधर में
वर्तमान में सीएसएमटी से गोरेगांव के बीच हार्बर लाइन की लोकल ट्रेनें दौड़ रही हैं। हार्बर मार्ग का अंधेरी से गोरेगांव तक का पिछला विस्तार २०१८ में पूरा किया गया था, लेकिन उसके बाद का काम बेहद धीमी गति से आगे बढ़ा। पिछले सात साल से काम अधर में पड़ा है। गोरेगांव से बोरीवली तक हार्बर रेलवे के अतिरिक्त ट्रैक और स्टेशनों के काम पर ८२५ करोड़ रुपए से अधिक खर्च किया जाएगा। गोरेगांव से मालाड तक २ किमी का पहला चरण और मालाड से बोरीवली तक ५ किमी का दूसरा चरण इस प्रकार हार्बर विस्तारीकरण प्रोजेक्ट का काम किया जाएगा।
