मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाहिंदी गजल - जिस दिन से करुणा का आँचल थामा है

हिंदी गजल – जिस दिन से करुणा का आँचल थामा है

जिस दिन से करुणा का आँचल थामा है
मत पूछो क्या खेल समय ने खेला है

उनसे भूल नहीं हो सकती किंचित भी
भूल तो वो करता है जो कुछ करता है

जीवन है घरवाला, इच्छा घरवाली
दौनों को तृष्णा सौतन से बचाना है

आया है जो कष्ट उसे स्वीकार करो
आगत का स्वागत करना ही अच्छा है

बलशाली का वंदन कौन नहीं करता
निर्बल का वंदन करना मानवता है

अन्नदान तो अन्नदान ही है लेकिन
भूखे को भोजन देना मानवता है

उद्गम का गन्तव्य स्वयं उद्गम पाया
सागर का जल सागर में मिल जाता है

भेद है विष पीने, विषपायी होने में
झुकता है वो ही शंकर कहलाता है

(बहुभाषी शायर नवीन सी चतुर्वेदी)

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