मुंबई: केंद्र सरकार के उपक्रमों की जमीनों पर दशकों से रह रहे लाखों किरायेदारों और चॉल निवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुंबई के जैम मिल के १३ निवासियों के खिलाफ नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (एनटीसी) द्वारा शुरू की गई बेदखली की कार्रवाई पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। इस बेहद जटिल और तकनीकी कानूनी लड़ाई में प्रभावित निवासियों का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता निमेष आर. मेहता ने रखा, जिनकी दलीलों के बाद कोर्ट ने यह सुरक्षात्मक आदेश जारी किया।

इस अदालती सफलता के बाद पब्लिक सेक्टर टेनेंट्स एक्शन कमेटी ने अब सीधे सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर मांग की है कि इस संवेदनशील विषय पर विभिन्न अदालतों के विरोधाभासी फैसलों को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए कम से कम ९ जजों की एक बड़ी ‘संविधान पीठ’ का गठन किया जाए।
अधिवक्ता निमेष मेहता ने कोर्ट के सामने डेटा प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्तमान में अकेले मुंबई शहर में अनुमानित १२ लाख से अधिक किरायेदार, चॉल निवासी, मिल मजदूर, उनके कानूनी वारिस और छोटे व्यवसायी केंद्र सरकार के विभिन्न उपक्रमों जैसे एनटीसी, एलआईसी, पोर्ट ट्रस्ट, रेलवे और मनपा प्रॉपर्टीज की जमीनों पर बसे हुए हैं। इन सभी पर ‘पब्लिक प्रेमाइसिस एक्ट, 1971’ के तहत बिना किसी वैकल्पिक आवास या पुनर्वास के बेदखली और भारी-भरकम जुर्माने का संकट मंडरा रहा है। अब तक इस कानूनी पेंच में किसी को भी राहत नहीं मिल पा रही थी, लेकिन जैम मिल के १३ निवासियों के मामले में मिली यह सुरक्षा इस दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ मानी जा रही है।

इस मामले में अधिवक्ता निमेष मेहता ने कहा कि यह विवाद किसी निजी संपत्ति का मामूली झगड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के हजारों-लाखों उन बुजुर्गों, पेंशनभोगी परिवारों, मिल मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आजीविका और मानवीय गरिमा से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इन परिसरों में बिताई है। एनटीसी जैसी संस्थाएं खुद तो राज्य सरकार की नीतियों के तहत पुनर्विकास के सारे फायदे और इंसेंटिव एफएसआई ले रही हैं, लेकिन जब बात किरायेदारों को उनका हक देने की आती है, तो वे बेदखली कानून का सहारा ले रहे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट से जैम मिल के निवासियों को मिली अंतरिम सुरक्षा ने यह साबित कर दिया है कि जनहित और मानवीय अधिकारों को तकनीकी कानूनों के नाम पर कुचला नहीं जा सकता। अब सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ से हमें न्याय की पूरी उम्मीद है।
