उमेश गुप्ता / वाराणसी
-आस्था की डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना की
धर्म और अध्यात्म की नगरी वाराणसी में गंगा दशहरा का पावन पर्व मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। ब्रह्ममुहूर्त से ही काशी के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और आरती की। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, संतानों के उज्ज्वल भविष्य और विश्व कल्याण की कामना की।
घाटों पर “हर-हर गंगे” और “हर-हर महादेव” के जयघोष लगातार गूंजते रहे, जिससे पूरा गंगातट आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से मां गंगा की पूजा-अर्चना की तथा दान-पुण्य कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाटों से सीधे काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दिन चढ़ने के साथ घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा वह पावन तिथि है, जब मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, पूजन, जप-तप और दान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है तथा व्यक्ति को पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
