बहुआयामी प्रतिभा की धनी बॉलीवुड की उभरती अदाकारा कृष्णा गौतम अब अभिनेत्री के साथ फिल्म निर्मात्री भी बनेंगी। राजधानी दिल्ली से निकलकर मायानगरी मुंबई में कदम रखने वाली कृष्णा गौतम अपने ‘नीड फॉर गुड’ फाउंडेशन के माध्यम से समाज कल्याण में किए योगदान के लिए डब्ल्यूईएफ द्वारा सबसे युवा पुरस्कार भी हासिल कर चुकी हैं। वैसे उन्हें फिल्म ‘१२ ओ क्लॉक’ (२०२१) के लिए भी जाना जाता है। प्रस्तुत हैं नवोदिता कृष्णा गौतम से हमारे संवाददाता सोम मिश्रा ‘शिवम’ की हुई बातचीत के प्रमुख अंश।
वर्तमान में आप किन प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं?
अभी तो मैं काफी समय से ट्राई कर रही हूं, कुछ अच्छा प्रोजेक्ट शुरू किया जाए। इंडस्ट्री में आजकल करके लोग अपना और मेरा भी समय खराब कर रहे हैं इसलिए अब और नहीं। अब मैंने ठान लिया है कि मैं अपनी क्रिएटिविटी को स्वयं प्रोड्यूस करके आगे बढूंगी, लोगों के इंतजार में अब और समय खराब नहीं करना है।
क्या कारण रहा जो एक अदाकारा अब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखने जा रही है?
आपको बता दूं कि मुझे अंक ज्योतिष में काफी विश्वास है और जन्म कुंडली में मेरा मंगल प्रभावशाली है इसलिए मुझे जो भी करना है शत-प्रतिशत सिनेमा के क्षेत्र में ही करना है। आपके पास अगर एक अच्छी स्क्रिप्ट है और आपके पास सिनेमा निर्माण के जरूरी संसाधन हैं तो आप फिल्म बना सकते हैं।
आप अपने अब तक के फिल्मी सफर को कैसे देखती हैं?
मेरी अभी तक की जो फिल्म यात्रा है उससे मैं काफी डरी सहमी हूं। सच कहूं तो अंदर बहुत घाव हैं जिनका भरपाना शायद ही संभव हो। जब मैं इंडस्ट्री में आई तब मुझे तमाम निर्माता निर्देशकों ने बड़े-बड़े सपने दिखाए लेकिन वह सब कामयाब नहीं हुए, सच कहूं तो अपनी फिल्म इंडस्ट्री बहुत खूबसूरत है लेकिन यहां कुछ लोग हैं जो ट्राई जरूर करते हैं लेकिन मैं फिर भी शुक्रिया करूंगी उन लोगों का जो सिर्फ ट्राई करते हैं वरना दूसरी जगह तो अनहोनी भी होने की शत-प्रतिशत गुंजाइश रहती है।
फिल्म जगत में कोई ऐसा वाक्य जिसने आपको अंदर से कमजोर किया हो?
ऐसी घटनाएं तो खास करके फिल्म इंडस्ट्री में आम होती हैं, लेकिन बहुत ज्यादा झकझोर दें मुझे ऐसा प्रतीत नहीं होता। एक बार मुझे किसी ने ट्राई करने की कोशिश की तो मैंने उसकी पत्नी को बता दिया उसके बाद से मेरे साथ अभी तक और कोई ऐसी घटना नहीं हुई है, जिसे मैं अपनाr यादों में संजोए रखूं। एक बार एक प्रोड्यूसर ने मुझे अपने ऑफिस बुलाया और वह बहुत सारे प्रश्न मेरी जिंदगी से जुड़े पूछने लगा मैं समझ नहीं पा रही थी आखिर ये बुड्ढा मेरे में इतना इंटरेस्ट क्यों ले रहा है, लेकिन मैंने उसके प्रश्नों को अनुउत्तर करते हुए वहां से निकलना जरूरी समझा लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे पता चला मेरा कई बड़ी जगह जहां मुझे काम मिलना सुनिश्चित था वहां से रातों-रात पत्ता कट गया।
अंग प्रदर्शन के प्रति आपका क्या नजरिया है?
वैसे तो अंग प्रदर्शन के प्रति बचपन से ही मेरा नजरिया सकारात्मक रहा है। मेरे परिवार में बचपन से ही मैंने छोटे से छोटे कपड़े पहने हैं। मेरा मानना है। अगर आप सिनेमा में कहीं पर स्विमिंग पूल, नदी, समुद्र की लहरों में सीन कर रहे हैं तो फिर आपको छोटे कपड़े ही पहनने पड़ेंगे। मैं बड़े प्रोडक्शनों की फिल्मों में देखती हूं उनके फिल्मों में अंग प्रदर्शन के दृश्य बिल्कुल भी बलगर नहीं लगते।
सिनेमा में बढ़ती अश्लीलता को आप कैसे देखती हैं?
आज सिनेमा में जिस तरह बहुत जरूरत से ज्यादा गाली-गलौज और नग्नता दिखाई जा रही है वह मेरी समझ से परे है। मैं इसके खिलाफ हूं। इस तरह खास करके हमारा भारतीय सिनेमा नहीं होना चाहिए। मुझे समझ नहीं आ रहा कि आज की युवा पीढ़ी इस तरह के घटिया मसाला सिनेमा को देखकर आखिर क्या संदेश लेना चाहती है। वहीं हमारे फिल्मकारों को भी सोचना चाहिए वो अश्लील दृश्य और गाली-गलौज को भी उस हद तक न दिखाएं, जो हमारी सोसायटी को एक वैंâसर की तरह अंदर से खोखला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
अपनी महत्वाकांक्षाओं पर प्रकाश डालें?
मुझे समाज सेवा से बेहद लगाव है। मैं चाहती हूं भारत में जितने भी खाली बंजर भूमि स्थल पड़े हैं उनको नेचर के साथ जोड़ने में मदद की जाए। वहां पर हरियाली का विकास हो हम जितना ज्यादा पेड़ पौधों को लगाएंगे और उनके करीब रहेंगे उतना ही स्वस्थ और मजबूत रहेंगे, क्योंकि पेड़ पौधे हमारा जीवन हैं। मैं नेचर के साथ जुड़कर आगे का जीवन यापन करना चाहती हूं।
