सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र राज्य शैक्षणिक संस्था महामंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन के माध्यम से महाविद्यालयों की विकास निधि बढ़ाने, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के न्यूनतम आवश्यक पदों को भरने, गैर-सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और पाठ्यक्रमों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का वेतन शिक्षण शुल्क के अनुसार तय करने जैसी विभिन्न मांगों पर तुरंत ध्यान देने का अनुरोध किया है। अगर सरकार इन मांगों की अनदेखी करती है तो महामंडल ने चेतावनी दी है कि स्कूल के पहले दिन प्रवेशोत्सव मनाने के बजाय स्कूल बंद कर दिए जाएंगे।
राज्य के कई अनुदानित कॉलेजों में हजारों सीटें खाली हो गई हैं, क्योंकि शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी उम्र के हिसाब से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जबकि छात्रों की संख्या बढ़ रही है। इसके कारण छात्रों को पढ़ाने या कॉलेज के दैनिक काम के लिए कर्मचारी वर्ग अपर्याप्त हो रहा है इसलिए शिक्षकों को रोटेशन के आधार पर नियुक्त किया जा रहा है। इसका असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है इसलिए शिक्षकों व गैर-शिक्षण कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरा जाए, महाविद्यालय के विकास कोष में वृद्धि की जाए, गैर-सहायता प्राप्त महाविद्यालयों व पाठ्यक्रमों के शिक्षकों व गैर-शिक्षण कर्मचारियों का वेतन शिक्षण शुल्क के अनुसार तय किया जाए, पुस्तकालयाध्यक्ष व रजिस्ट्रार के पद भरे जाएं, शिक्षण संस्थाओं को संपत्ति कर से पूर्ण छूट दी जाए, सहायता प्राप्त विद्यालयों व महाविद्यालयों को आवासीय दरों पर बिजली की दरें ली जाएं, सौर ऊर्जा सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनुदान स्वीकृत करने सहित अन्य मांगे महाराष्ट्र राज्य शैक्षणिक संस्था महामंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर की है। साथ ही महामंडल ने चेतावनी भी दी है कि यदि सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो स्कूल के पहले दिन कोई भी जनप्रतिनिधि स्कूल में न आए और प्रवेशोत्सव मनाए बिना ही स्कूल बंद कर दिया जाएगा। इसी तरह महामुंबई शिक्षण संस्था संगठन ने भी महामंडल के इस निर्णय का समर्थन किया है।
