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अपूर्व उत्साह, जल्लोष! घोषणाओं और तालियों से षण्मुखानंद गूंज उठा!!.शिवसेना के ६०वें स्थापना दिवस का जोरदार और दमदार समारोह… उद्धव ठाकरे ने गद्दार सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों की जनता से मांगी माफी

`३० साल भाजपा के साथ रहकर भाजपा में विलीन नहीं हुए तो अब कांग्रेस में क्या विलीन होंगे? शिवसेना विलीन होने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की रक्षा और न्यायसंगत अधिकारों की लड़ाई के लिए है।’

`आज जो कुछ भी गद्दारी हुई है, मैं उस-उस वॉर्ड के तमाम मतदाताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगता हूं। क्योंकि उन सभी मतदाताओं ने, जब मोदी की लहर चल रही थी… तब मुझ पर और बालासाहेब पर भरोसा करके इन्हें चुनकर भेजा था। जो हमें चिढ़ा रहे थे कि तुम्हारे सांसद मोदी के चेहरे पर चुनकर आए हैं, (वे देख लें कि) मोदी का चेहरा इस्तेमाल किए बिना हमारी शिवसेना के नौ सांसद शान से चुनकर आए। कहां थे मोदी?’

सामना संवाददाता / मुंबई

जिस भाजपा को हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे ने उंगली पकड़कर सहारा दिया, आज वही भाजपा शिवसेना को खत्म करने निकली है। भाजपा सत्तापिपासु बन गई है और अब शिवसेना को खत्म करने के अभियान में जुटी है। अपनी लालसा के लिए भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है। इस तरह का जोरदार हमला शिवसेना के ६०वें स्थापना दिवस समारोह में पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा और गद्दार सांसदों पर बोला, इस दौरान उन्होंने गद्दारों के लिए उनके क्षेत्र की जनता से माफी मांगी।
उन्होंने षण्मुखानंद सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और पक्ष के कुछ सांसदों की गद्दारी से शिवसेना को संकट में होने की बात कही जा रही है, लेकिन यह शिवसेना के लिए न्याय नहीं है।
– ठाकरे परिवार का संघर्ष
जो लोग ठाकरे परिवार के बारे में बोलते हैं, क्या उन्हें अंदाजा भी है कि इस परिवार ने क्या-क्या झेला है? प्रबोधनकार (ठाकरे) को भी बहुत कुछ सहना पड़ा था; वे पूरे परिवार को लेकर महाराष्ट्र भर भटकते रहे। शिवसेनाप्रमुख (बालासाहेब) ने क्या-क्या सहन किया, यह पूरी दुनिया जानती है।
-गद्दारों से सवाल
‘जब ठाकरे परिवार पर उंगलियां उठाई गईं, तब इन गधों में से कौन विरोधियों के वार अपने सीने पर झेलने आगे आया था?’
-सत्ता का लालच
‘आखिर किसलिए पार्टी तोड़ी जा रही है, यह तोड़-फोड़ किस मकसद से चल रही है? ये लोग आखिर क्या साबित करना चाहते हैं? इससे साफ पता चलता है कि सत्ता के लालची लोगों की मानसिकता कैसी होती है।’
– देश के युवाओं की स्थिति
‘जिस देश में नौजवानों को ‘कॉकरोच’ समझ लिया जाए, उस देश का भविष्य भला क्या होगा?’
-तानाशाही की ओर कदम
‘यह देश अब ‘वन पार्टी, नो इलेक्शन’ (एक ही पार्टी और कोई चुनाव नहीं) की दिशा में आगे बढ़ रहा है।’
– किसानों की बदहाली और नेताओं की खरीद-फरोख्त
‘आज किसानों की फसल को सही दाम (एमएसपी) नहीं मिल पा रहा है, लेकिन दूसरी तरफ सांसदों और विधायकों का ‘दाम’ तय हो चुका है। इनके पास इतना अंधा पैसा आ कहां से रहा है?’

-लोकतंत्र से खत्म हो रहा है लोगों का विश्वास -उद्धव ठाकरे

-हम सत्ता के लिए पैदा नहीं हुए, सत्ता हमारे लिए है

आज भाजपा जिस तरह की गंदी राजनीति कर रही है, उससे लोकतंत्र को खतरा है। ऐसा ही चलता रहा तो देश अराजकता में चला जाएगा। लोकतंत्र से लोगों का विश्वास खत्म हो रहा है। ऐसे में हमें ‘ऑपरेशन कमल’ करना पड़ेगा। ऐसा जोरदार हमला शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के ६०वें स्थापना दिवस के अवसर पर षण्मुखानंद सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा और शिंदे गुट पर किया।
उन्होंने कहा कि शिवसेना ने हमेशा संघर्ष किया है। यह कोई नया नहीं है। शिवसेना को सत्ता का लालच नहीं है। हम सत्ता के लिए पैदा नहीं हुए हैं, बल्कि सत्ता हमारे लिए है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के एक बयान का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा ‘एक पार्टी नो इलेक्शन’ की ओर बढ़ रही है। इसीलिए वह लोकतंत्र को खत्म करने पर तुली है। लेकिन महाराष्ट्र इस प्रकार की गंदी राजनीति को कभी नहीं सहेगा।
भाग खड़े हुए थे भाजपाई
उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब बाबरी मस्जिद गिराई गई थी तब भाजपाई भाग खड़े हुए थे। उस समय हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे खुलकर राम मंदिर के लिए खड़े हुए थे। भाजपा पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि तुम कुर्सी के लिए बालासाहेब ठाकरे को भूल गए हो, राजनीति कभी इतनी गंदी नहीं थी कि जिस बालासाहेब ठाकरे ने तुम्हें महाराष्ट्र में खड़ा होने की जगह दी। आज उन्हीं की पार्टी को तोड़ने निकले हो।
डकैतों के हाथ में नहीं जाने देंगे शिवसेना
इस दौरान उद्धव ठाकरे ने जोर देकर कहा कि सोने की शिवसेना डवैâतों के हाथ में नहीं जाने देंगे।
शिवसैनिकों से उन्होंने अपील करते हुए कहा कि शिवसैनिक ही मेरी संपत्ति हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिवसेना पर कई संकट आए और यह संकट कोई बड़ा संकट नहीं है, संकट का सामना करनेवाले शिवसैनिक मेरे साथ हैं। उन्होंने विलीनीकरण की राजनीति पर विरोधियों को जवाब देते हुए कहा कि मुझे अब डर लगने लगा है कि कहीं शिंदे गुट का भाजपा में विलीनीकरण ना हो जाए।
उन्होंने कहा कि यदि देश की युवा पीढ़ी को तुच्छ समझा जाएगा तो देश का भविष्य क्या होगा? उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में पर्चा भरते ही लोगों को उठा लिया जाता है।
पैसे से खरीदे जा रहे हैं नेता
उद्धव ठाकरे ने कहा कि कम उम्र के युवाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था, उसी कम उम्र के युवाओं के बलिदान से देश को आजादी मिली। जेन-जी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत माता को किसी भी कीमत पर गुलामी में नहीं रहने दिया जा सकता।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शिवसेना भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला कर ले तो ये लोग क्या करेंगे? जनता नेताओं को चुनकर भेजती है और बाद में उन्हें पैसों के बल पर खरीदा जा रहा है। यह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है।
गद्दारों से भरा पड़ा है इतिहास
उन्होंने कहा कि इतिहास गद्दारों से भरा पड़ा है। छत्रपति शिवाजी महाराज, साहू, फुले के काल में भी गद्दार थे। खंडोजी खोपड़े और सूर्याजी पिसाल जैसे गद्दारों के माथे से चार सौ साल बाद भी विश्वासघात का दाग नहीं मिटा है।
उद्धव ठाकरे ने ‘लाडली बहन’ योजना का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं के लिए बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन बाद में लाखों लाभार्थी महिलाओं की किश्तें बंद कर दी गर्इं। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को जिताने का आह्वान उन्होंने किया था और शिवसैनिकों ने पूरी मेहनत से उन्हें चुनाव जिताया। ऐसे में जनता को यह पूछने का पूरा अधिकार है कि वे नेता आखिर पार्टी छोड़कर क्यों जा रहे हैं।
…तो छोड़ देंगे पद
उन्होंने एक किसान का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान एक किसान उनके पास अपनी मेहनत की कमाई से भरा बटुआ लेकर आया था और चुनाव में मदद करने की इच्छा जताई थी। ऐसे हजारों किसानों और आम लोगों के प्रेम, विश्वास और त्याग की बदौलत उनके उम्मीदवार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे।
उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप सही हैं तो शिवसैनिक उन्हें बताएं। वे इसी क्षण पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। अपने संबोधन का समापन करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं पहाड़ की तरह मजबूती से खड़ा रहूंगा, लेकिन जिस दिन शिवसैनिकों को लगेगा कि मुझे पद छोड़ देना चाहिए, उसी दिन मैं पद छोड़ दूंगा।

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