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मुंबई में ‘सांस’ महंगी, ‘धुआं’ मुफ्त! …शहर में ठंड और प्रदूषण की दोहरी मार से बेहाल मुंबईकर

राजन पारकर / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इन दिनों ऐसी दोहरी मार झेल रही है कि मुंबईकर समझ नहीं पा रहे हैं कि करें क्या? ठंड से कांपें, प्रदूषण से खांसें या दोनों का कॉम्बो ऑफर एक साथ लें। शहर का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) १७६ पर पहुंच चुका है और कई उपनगरों में २०० के पार। यानी हवा इतनी ‘स्वच्छ’ हो चुकी है कि लोग मास्क नहीं उतार रहे। डर नहीं, आदत से।
ठंड का आलम यह है कि नवंबर ने दिसंबर का ओवरटाइम पकड़ लिया है। रात का तापमान २१ डिग्री और सांताक्रूज में तो १६। ऐसे में मुंबईकरों के दिल से एक ही आवाज उठ रही है कि ये मुंबई है या मनाली का ट्रायल वर्जन? मौसम विभाग हमेशा की तरह सांत्वना देते हुए यही राग अलाप रहा है कि बस, कुछ दिनों में मौसम सुधर जाएगा। नागरिकों के लिए सुझाव बहरहाल, ऐसे हाल में (जिन्हें मानना मजबूरी है, शौक नहीं) सुबह-शाम बाहर निकलना टालें। इस समय हवा में ऑक्सीजन कम और ‘उपद्रव’ ज्यादा होता है। एन९५ मास्क अनिवार्य: चेहरा ढके रहने से ज्यादा, फेफड़े ढंकना जरूरी है। गरम कपड़ों का प्रयोग: मुंबई में स्वेटर पहनना अब ‘हेल्थ एडवाइजरी’, पैâशन नहीं। पर्याप्त पानी पीएं: शरीर में पानी और दिमाग में संयम—दोनों आवश्यक। डॉक्टरों ने विशेष तौर पर दमा, हृदयविकार और श्वसन रोगियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
निर्माण + वाहन= ‘प्रदूषण का परफेक्ट पावरहाउस’
शहर में निर्माण कार्यों का ऐसा महाभारत चल रहा है। उस पर वाहनों का धुआं-जैसे सड़कें नहीं, गैस चेंबर हों। दोनों मिलकर प्रदूषण का परफेक्ट पावर हाउस बना रहे हैं। अपनी हालत देखकर खुद हवा भी कहे, ‘मैं तो जा रही हूं, तुम लोग भुगतो!’ कम हवा प्रवाह के कारण प्रदूषण जमीन पर ही अटका पड़ा है, और मुंबईकरों की नाकें इन अनचाहे मेहमानों की पूरी मेजबानी कर रही हैं। ठंड का कारण है हवाओं का बदलना और मौसम का तमाशा।

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