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अंदर की बात : शनिशिंगणापुर में तेल की मिलावट, अब मुंढे की नजर?

राजन पारकर

शनिशिंगणापुर जैसे श्रद्धास्थल पर भगवान शनिदेव को अर्पित किए जाने वाले तेल में कथित मिलावट की शिकायत सामने आना गंभीर मामला है। राष्ट्रीय श्रीराम संघ की ओर से इस मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग किए जाने की चर्चा है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में अब सवाल उठ रहा है कि क्या एफडीए की टीम यहां भी दस्तक देगी? आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की कथित धड़ाधड़ कार्रवाई की चर्चा पहले ही प्रशासनिक हलकों में है। मिठाई की दुकानों से लेकर होटल, कैंटीन और खाद्य प्रतिष्ठानों तक कार्रवाई के बाद अब शनिशिंगणापुर की शिकायत ने नई चर्चा को जन्म दिया है। श्रद्धा के नाम पर मिलावट का धंधा चलाने वालों को भगवान नहीं, कानून का डर होना चाहिए। भक्त चढ़ावा श्रद्धा से चढ़ाता है; उसमें भी अगर मिलावट का खेल हो रहा है तो यह सिर्फ खाद्य सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि आस्था के साथ खिलवाड़ है। अब देखना यह है कि शिकायत फाइलों में घूमती है या सचमुच कार्रवाई की गाड़ी शनिशिंगणापुर पहुंचती है! मुंबई में भेदभाव की भाषा, नेवी नगर में एक परिवार की त्रासदी और शनिशिंगणापुर में कथित मिलावट की शिकायत, तीनों घटनाएं एक सवाल छोड़ती हैं कि व्यवस्था जागेगी कब।
मुंबई से शनिशिंगणापुर तक एक ही संदेश, मनमानी नहीं चलेगी, जवाब देना ही पड़ेगा!
मुंबई में घर के नाम पर खान-पान की पसंद को लेकर भेदभावपूर्ण विज्ञापन हो या फिर नेवी नगर की दिल दहला देने वाली घटना, अथवा शनिशिंगणापुर में कथित मिलावटी तेल का मामला तीनों घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इनके पीछे व्यवस्था, संवेदनशीलता और जवाबदेही का सवाल एक ही है। राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी है कि अब केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा; जनता जवाब चाहती है और प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद करती है।
अमित ठाकरे की फटकार और भावेश कावरे का यू-टर्न!
‘मांसाहारी लोगों को घर नहीं, शाकाहारियों का स्वागत’ मुंबई जैसे महानगर में ऐसी भाषा लिखकर कोई समाज को खान-पान के नाम पर बांटने की कोशिश करे और फिर विवाद खड़ा होने पर सफाई दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। चर्चा है कि विवाद बढ़ता देख मनसे नेता अमित ठाकरे ने भावेश कावरे को बुलाकर अच्छी तरह समझाया। नतीजा यह हुआ कि कावरे को मुंबईकरों से माफी मांगनी पड़ी। मुंबई किसी एक की जागीर नहीं है। यहां गुजराती, मराठी, पंजाबी, दक्षिण भारतीय, मुस्लिम, जैन, हिंदू हर समाज का आदमी रहता है। खान-पान की पसंद निजी मामला हो सकता है, लेकिन उसके नाम पर किसी दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश मुंबई की संस्कृति को मंजूर नहीं। घर बेच रहे हो या समाज का प्रमाणपत्र?
नेवी नगर के चार शव और एक खामोश सवाल!
कुलाबा के नेवी नगर में नौसेना कर्मी, उनकी पत्नी और दो बच्चों के शव मिलने की घटना ने मुंबई को झकझोर कर रख दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, परिवार के चारों सदस्यों की मौत हुई है और घटना को लेकर आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। यह केवल पुलिस की फाइल में दर्ज होने वाली एक घटना नहीं है। इसके पीछे आखिर ऐसा कौन-सा मानसिक, पारिवारिक या आर्थिक दबाव था, जिसने एक परिवार को इस मुकाम तक पहुंचाया? वर्दी के पीछे भी एक इंसान होता है। प्रशासन को केवल घटना की जांच नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे कारणों की तह तक जाना होगा। वरना चार शव पंचनामा बनकर रह जाएंगे और असली सवाल फिर किसी अगली घटना तक दबा रहेगा।

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