-५०० करोड़ के बावजूद प्रोजेक्ट अधूरा!
-लागत में बेतहाशा वृद्धि,
-डिजाइन बदलने के नाम पर लूट
धीरेंद्र उपाध्याय
मुंबई के बोरीवली स्थित भगवती अस्पताल का पुनर्विकास कार्य महाघोटाले के रूप में उभर चुका है। ५०० करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत के बावजूद यह प्रोजेक्ट अब तक अधूरा पड़ा है, जबकि वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भी पश्चिमी उपनगर के लाखों निवासियों को उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखा गया है। यह घोटाला सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है, जहां डिजाइन में बदलाव के नाम पर लागतों को लगातार बढ़ाया गया और निर्माण कार्यों को जानबूझकर लटकाया गया। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे प्रकरण में गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। इस घोटाले ने न सिर्फ मनपा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के भविष्य को भी खतरे में डाल दिया है। जनता के करोड़ों रुपए की इस खुली लूट के विरोध में अब स्थानीय नागरिक और राजनीतिक दल एकजुट हो रहे हैं, जो इस महाघोटाले की पूरी तह तक पहुंच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
दो चरणों में हुआ विकास
भगवती अस्पताल के पुनर्विकास के पहले चरण में निर्मित नर्सिंग प्रशिक्षण केंद्र की इमारत में रोगी सेवा के लिए ११० बेड वाला चिकित्सा विभाग जुलाई २०१६ से शुरू किया गया है। पुनर्विकास के दूसरे चरण में ४९० बेड वाला अत्याधुनिक उच्चस्तरीय अस्पताल सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के साथ शुरू किया जाएगा। इससे पश्चिम उपनगर के निवासियों को विशेष और सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा उपचार सुविधाएं घर के नजदीक उपलब्ध होंगी।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा अस्पताल
पूर्ण रूप से चालू होने के बाद भगवती अस्पताल ३७३ बेडों के साथ कार्य करेगा, जिसे भविष्य में ४९० बेडों तक विस्तारित किए जाने की योजना है। इससे केईएम, कूपर और नायर जैसे प्रमुख सार्वजनिक अस्पतालों पर मरीजों के बोझ में कमी आने की उम्मीद है। अस्पताल में मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और पीडियाट्रिक्स जैसे मुख्य विभागों के साथ-साथ नेप्रâोलॉजी, कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त, अस्पताल में अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, वैâथ लैब और उन्नत डायग्नोस्टिक यूनिट जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी। मनपा के उपायुक्त (स्वास्थ्य) शरद उगडे के अनुसार भगवती अस्पताल का पूर्ण संचालन मुंबई में स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करने और केंद्रीय अस्पतालों पर दबाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य पर गहराता संकट
मुंबई निवासी सुजीत दुबे ने कहा कि अस्पताल के निजीकरण से मुंबई की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के भविष्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह निर्णय एक खतरनाक मिसाल कायम करता है, जिसके तहत मनपा के अन्य अस्पतालों को भी निजी हाथों में सौंपे जाने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इससे न केवल गरीब और वंचित वर्गों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहना पड़ेगा, बल्कि शहर की अधिकांश आबादी को महंगे निजी इलाज के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सरकार का यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को कमजोर करने और निजी स्वास्थ्य कंपनियों के हितों को बढ़ावा देने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
जनहित के नाम पर जनता के साथ धोखा
ठाणे निवासी राकेश हरिजन ने कहा कि भगवती अस्पताल के निजीकरण का निर्णय आम जनता के साथ एक गंभीर विश्वासघात साबित हो रहा है। इसके साथ ही अन्य मनपा अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को भारी आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा। यह निर्णय संविधान में वर्णित ‘स्वास्थ्य के अधिकार’ का सीधा उल्लंघन है और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है।
