फिरोज खान
हंगरी देश के छोटे से शहर में लोगों की अचानक मौतें होने लगीं। मरनेवाले लोग कुंवारे नहीं, बल्कि शादीशुदा थे। आए दिन पतियों की हो रही मौतों से सारे शहर में हड़कंप मचने लगा। हर शादीशुदा आदमी डर के साए में नजर आने लगा। आलम यह था कि चंद सालों में १०० से ज्यादा शादीशुदा लोगों को मौत निगल चुकी थी। गुमनाम मौत का राज बरकरार था। किसी को कुछ पता नही ंचल रहा था कि आखिर यह सब क्यों और वैâसे हो रहा है? पत्नियों से पूछताछ में भी पुलिस के हाथ क्लू नहीं लग रहा था। पत्नियों का एक ही जवाब रहता था। अचानक उनके पति की मौत हो गई। मौतें भी नेचुरल मालूम होती थीं, क्योंकि किसी के भी शरीर पर न तो जख्म के निशान होते और न ही चाकू के वार होने के निशान होते / पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मरने की कोई साफ वजह सामने नहीं आ रही थी। हाल यह हो गया कि शहर को कातिलों का शहर कहा जाने लगा। हर एंगल से जांच करने के बाद भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा तो पुलिस ने पैâसला लिया कि मरे हुए लोगों की लाशें कब्र से निकाली जाएं और पोस्टमार्टम के लिए बड़े सरकारी अस्पताल में भेजा जाए। पुलिस ने कुछ ताजी लाशों को निकाला और शहर से दूर अस्पतालों में भेजा। वहां चौंका देनेवाली बात सामने आई कि सभी की मौत आर्सेनिक जहर से हुई है। यानी कि सभी को एक ही तरीके का जहर दिया गया था। इस तरह की जानकारी मिलते ही पुलिस ने कुछ पत्नियों को हिरासत में लिया और सख्ती से पूछताछ की तो हैरान कर देनेवाली बात सामने आई। औरतों ने पुलिस को बताया कि शहर में एक दाई है, जिसके पास पत्नियां अपना दर्द साझा करने के लिए उसके पास जाती थीं। पकड़ी गई पत्नियों ने बताया कि जब वे अपना दर्द लेकर दाई के पास जाती तो वह एक ही हल बताती थी। पति को `फरिश्ता’ बना दो। यानी ईश्वर के पास भेज दो। दाई को आधुनिक केमिकल की भी अच्छी जानकारी थी और उसने खतरनाक आर्सेनिक जहर बनाकर महिलाओं को देना शुरू किया था। दाई को गिरफ्तार करने जब पुलिस उसके घर पहुंची तो उसने गिरफ्तारी से पहले अपने द्वारा बनाया हुआ जहर निगल लिया, इससे उसकी मौत हो गई।
