मुख्यपृष्ठस्तंभपड़ताल :  बीमार है कामगार अस्पताल!

पड़ताल :  बीमार है कामगार अस्पताल!

– सुविधाओं से मरीज वंचित… ६ सालों से अस्पताल का काम अधूरा

द्रुप्ति झा

मुंबई में सरकारी अस्पताल की सुविधाएं बदहाल नजर आ रही हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित अंधेरी-पूर्व के एमआईडीसी स्थित ईएसआईसी कामगार अस्पताल में इलाज के लिए आनेवाले मरीजों की संख्या तो अच्छीखासी हैं, लेकिन सभी बीमारियों का इलाज नहीं होने से मरीजों के चेहरों पर उदासीनता नजर आती है। बता दें कि २०१७ में अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद से अस्पताल बंद पड़ा रहा। हालांकि, चार साल और आठ महीने के लंबे अंतराल के बाद १४ अगस्त २०२३ को पहले चरण में ओपीडी शुरू किया गया, जिसके बाद अस्पताल फरवरी २०२४ तक पूरी तरह से चालू करने की बात कही गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत तो यह है कि अभी भी अस्पताल की इमारत की कुछ मंजिलों पर काम चल ही रहा है और सभी बीमारियों के ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं हैं। ‘दोपहर का सामना’ संवाददाता ने कुछ दिनों तक अंधेरी स्थित कामगार अस्पताल के भीतर मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का पता किया, जिसमें पता चला कि अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्वैâन, सर्जरी और किसी भी तरह के ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने की वजह से मरीजों को पूरी तरह से इलाज नहीं मिल पाता है और उनको कांदिवली-पूर्व में स्थित ईएसआईसी कामगार अस्पताल में रेफर किया जाता है, जबकि अंधेरी और कांदिवली क्षेत्र के लोगों के लिए अलग-अलग अस्पताल हैं। लोगों की शिकायत है कि हमें यहां पर इलाज नहीं मिलने की वजह से १५ किलोमीटर का सफर तय करना मुश्किल हो जाता है, खास करके बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए। निजी अस्पतालों में ये जांचें महंगी होने के कारण गरीब मरीज इन्हें करा नहीं पाते हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। अस्पताल का ऐसा हाल होने से मरीजों के लिए अपना इलाज करवाना चुनौती बन चुका है। इस मामले में अस्पताल के डीन से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। हालांकि, नाम न बताने की शर्त पर अस्पताल के कर्मचारियों ने मार्च में इलाज की सुविधाएं बढ़ने की बात कही है।
इलाज के लिए आई शापुर से पूजा कदम ने मजबूरी में अपने बच्चे को जमीन पर सुलाया। जमीन पर सुलाने का कारण पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि क्या करें, यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
पूजा लेखराज गौड़ ने बताया कि मुझे पिछले तीन हफ्तों से एक रिपोर्ट के लिए दौड़ा रहे हैं। स्टाफ टाइम से नहीं आता है। सुबह १० बजे आएंगे रिपोर्ट देने वाले ऐसा बोलकर दो घंटे बिठाते हैं, फिर बोलते हैं कि ११ बजे आएंगे। आर्यन शाह ने कहा कि यहां का स्टाफ कुछ पूछने पर मरीज को जल्दी प्रतिक्रिया नहीं देता है और इलाज संबधी पेपर से जुड़ी चीजों के बारे में बताते नहीं हैं। यह सब अस्पताल प्रशासन की लापरवाही है। कमर के दर्द से जूझ रहे ७० साल के चटोपाध्याय ने कहा कि यह सिर्फ नाम के लिए अस्पताल है, इलाज के मामले में नहीं। मुझे एक टेस्ट के लिए तीन जगह भेजा गया।
वर्ष २०१७ में लगी थी भीषण आग
अंधेरी स्थित ईएसआईसी कामगार अस्पताल की चौथी मंजिल पर आग लगने की घटना को शायद ही कोई भूल पाएगा। उस हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई थी। एक ६ महीने की बच्ची की भी मौत हो गई थी।

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