-असली कमाई नौकरी से या आईपीओ से?
भरतकुमार सोलंकी
मुंबई
आपने पांच वर्ष पहले जो एसआईपी शुरू की थी, क्या आज भी उसका मासिक निवेश उतना ही है? यदि हां, तो क्यों? क्या पिछले पांच वर्षों में आपकी सैलरी भी नहीं बढ़ी? यदि नहीं बढ़ी, तो उसका कारण क्या है? क्या आपकी स्किल में वृद्धि नहीं हुई या आपने अपनी ऊर्जा और समय सही दिशा में लगाया ही नहीं? एक और सवाल पूछिए। पिछले पांच वर्षों में आपने कितने आईपीओ भरे? कितने में अलॉटमेंट मिला? कितनों में लिस्टिंग गेन कमाया और कितनों में नुकसान हुआ? अब जरा यह भी जोड़िए कि इन सब गतिविधियों में आपका कितना समय गया? आवेदन करना, पैसे ब्लॉक करना, अलॉटमेंट देखना, लिस्टिंग पर बेचने का निर्णय लेना, बाजार पर नजर रखना-क्या यह सब आपकी नौकरी का हिस्सा था?
यदि यही समय आप अपनी मूल विशेषज्ञता, अपनी नौकरी या अपने व्यवसाय को बेहतर बनाने में लगाते, नई स्किल सीखते, अतिरिक्त जिम्मेदारियां लेते और अपने नियोक्ता के लिए अधिक मूल्य पैदा करते, तो क्या आपकी सैलरी बढ़ने की संभावना अधिक नहीं होती? और यदि सैलरी बढ़ती, तो क्या आपकी एसआईपी भी हर वर्ष बढ़ाई नहीं जा सकती थी? सवाल यह है कि वेल्थ क्रिएशन का सबसे मजबूत इंजन क्या है-बार-बार आईपीओ भरना या अपनी आय बढ़ाना? यदि आपकी मासिक आय ही नहीं बढ़ रही, तो निवेश की क्षमता वैâसे बढ़ेगी? और यदि निवेश की क्षमता नहीं बढ़ेगी, तो बड़ी संपत्ति का निर्माण वैâसे होगा? हमारे आसपास पिछले चालीस वर्षों के ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां लोगों ने शेयर ट्रेडिंग के मोह में अपना स्थापित व्यवसाय कमजोर कर दिया। कई नौकरीपेशा लोग भी दिनभर चार्ट देखने लगे, लेकिन न नौकरी में प्रगति हुई और न बाजार से स्थायी कमाई। अंतत: दोहरी हानि हुई-करियर भी प्रभावित हुआ और पूंजी भी। इसका अर्थ यह नहीं कि आईपीओ या शेयर बाजार गलत हैं। निवेश आवश्यक है, लेकिन निवेश और व्यवसाय अलग-अलग भूमिकाएं हैं।
आपकी नौकरी या व्यवसाय आपकी आय पैदा करने वाली मशीन है, जबकि म्यूचुअल फंड, शेयर या अन्य निवेश उस आय को संपत्ति में बदलने के साधन हैं। यदि मशीन पर ध्यान ही नहीं देंगे, तो उसमें डालने के लिए र्इंधन कहां से आएगा?
पुरानी कहावत है-‘जिसका काम उसी को साजे, दूजा करे तो उल्लू बाजे।’ इसका अर्थ यह नहीं कि नया सीखना गलत है, बल्कि यह है कि अपनी मुख्य योग्यता की उपेक्षा करके दूसरे क्षेत्र में भाग्य आजमाना अक्सर महंगा पड़ता है। इसलिए हर वर्ष केवल अपने पोर्टफोलियो का ही नहीं, अपनी सैलरी, स्किल और एसआईपी का भी वार्षिक मूल्यांकन कीजिए। लक्ष्य केवल अच्छा निवेशक बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि बेहतर कमाने वाला, बेहतर बचत करने वाला और बेहतर निवेशक बनना होना चाहिए। याद रखिए, आईपीओ आपकी किस्मत बदल भी सकता है और नहीं भी; लेकिन आपकी स्किल, आपकी आय और नियमित बढ़ती एसआईपी-ये तीनों मिलकर आपकी आर्थिक स्वतंत्रता की मजबूत नींव अवश्य रख सकते हैं।
