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कोल्ड चेन उपकरणों की निविदा प्रक्रिया में अनियमितता…पांच गुना अधिक दाम पर खरीदे गए उपकरण!.. स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के आदेश

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने टीकों के भंडारण के लिए कोल्ड चेन उपकरणों के लिए ६२ करोड़ रुपए की निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। मीडिया में आई खबर के बाद केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को आरोपों की जांच करने और रिपोर्ट सौंपने को कहा है। यह एक सप्ताह के अंतराल में राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा आदेशित दूसरी जांच है।
पिछले सप्ताह विभाग ने महाराष्ट्र मेडिकल गुड्स प्रोक्योरमेंट ऑथॉरिटी (एमएमजीपीए) को चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए ५६ करोड़ रुपए की निविदा देने में कथित अनियमितताओं की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। कोल्ड चेन उपकरण मामले में यह आरोप लगाया गया है कि पिछले साल विधानसभा चुनावों की घोषणा से कुछ दिन पहले ही इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, लेकिन निविदा दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया और उपकरण बाजार मूल्य से चार से पांच गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए। प्राप्त शिकायतों के आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के सचिव निपुण विनायक ने २ जून को स्वास्थ्य सेवा आयुक्त को ‘विस्तृत जांच कर कार्रवाई करने’ का निर्देश दिया।
१८ अप्रैल को शिकायतकर्ता ने नाम न बताने का अनुरोध करते हुए केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत की थी, जिसमें आरोप लगाया कि अधिकारियों व ठेकेदारों ने मिलकर सरकार को ४० से ५० करोड़ रुपए का चूना लगाया है। इसमें कहा गया है कि न केवल उपकरण चार से पांच गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए, बल्कि टेंडर की शर्तें दो खास ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई थीं, ताकि कार्टेलाइजेशन सुनिश्चित हो। मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बावजूद ठेकेदार को २२ करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
खरीद नीति का घोर उल्लंघन
उप निदेशक, स्वास्थ्य सेवा (परिवहन), महाराष्ट्र, पुणे ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ४ और ५ जुलाई, २०२४ को आइस-लाइन्ड रेप्रिâजरेटर (आईएलआर) और डीप प्रâीजर की खरीद के लिए टेंडर जारी किए थे। शिकायत में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में निविदा की पात्रता मानदंड और अनिवार्य शर्तों का घोर उल्लंघन पाया गया। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशा-निर्देश, सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर) २०१७ और महाराष्ट्र राज्य खरीद नीति का उल्लंघन किया गया। साथ ही अधूरे और फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने जैसी अनियमितताएं तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया में पाई गर्इं।

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