मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : इजरायल निल बटे सन्नाटा ...ये डील नहीं तमाचा!

मुस्लिम वर्ल्ड : इजरायल निल बटे सन्नाटा …ये डील नहीं तमाचा!

सुफी खान

ईरान-अमेरिका डील दरअसल ईरान की जीत है और इजरायल का मुश्किलों भरा वक्त अब शुरू होता है। इजरायल ने अपने दोस्त अमेरिका को भी एक तरह से खो दिया है। १४ में से १० या १२ पॉइंट ईरान के पक्ष में हैं और एक या दो अमेरिका के वहीं इजरायल के हाथ खाली हैं। जबकि उसी ने २८ फरवरी को ईरान पर अटैक किया था। इन १४ पॉइंट में ऐसा कोई वादा नहीं है जिसमें कहा गया हो कि ईरान हिजबुल्लाह हूती या हश्दुश्शाबी जैसे अपने प्रॉक्सी संगठनों को सपोर्ट नहीं करेगा। यानी ईरान जिन्हें रजिस्टेंस कहता है वो कायम रहेगा और अब एक तरह से अमेरिका ने भी उसे हरी झंडी दे दी है।
न्यूक्लियर के मुद्दे पर भी इजरायल के मन की नहीं हुई। ईरान और अमेरिका अगले ६० दिनों में इस पर बात करेंगे। लेकिन ईरान का इस डील से जबदस्त फायदा होने जा रहा है। जैसे ही प्रâांस में ट्रंप और ईरान में प्रेसिडेंट मसूद पजेश्कियान ने एमओयू पर साइन किये, वैसे ही ईरान के ऊपर से तत्काल कुछ प्रतिबंध हट गए। ईरान अपना जो तेल और गैस चीन और अन्य देशों को पहले यहां-वहां से औने–पौने दामों में बेचता था अब दुनिया में किसी भी देश को खुल कर बेचेगा। जिस रेट में बेचना होगा बेचेगा। इसका मतलब ये है कि अगले कुछ सालों में ईरान मिडिल ईस्ट में धूम मचा देगा।
ईरान के खाते में उसके अपने २४ अरब डॉलर आने वाले हैं। ३०० बिलियन डॉलर अमेरिका देगा जंग में हुए नुकसान की भरपाई के लिए। ये डील की शर्तों में शामिल है। इधर इजरायल के हाथ बंध गए हैं। जो वो चाहता था वैसा कुछ नहीं करवा पाया। वो ईरान के साथ अमेरिका के जरिए कुछ नहीं करवा पाया, उलटा ट्रंप एक तरह से सरेंडर हैं क्यों कि डील ईरान की शर्तों पर हो रही है। अब अगर इजरायल ने कोई भी आक्रामकता दिखाई तो डील अपने आप टूट जाएगी।
खबरें बताती हैं कि अमेरिका में मौजूद इजरायल समर्थक लॉबी को सांप सूंघ गया है। वो कह रहे हैं कि आपने इजरायल से सेल्फ डिफेंस का हक ले लिया। एक्सपर्ट कहते हैं कि इस डील से ऐसा लग रहा है कि पहली बार ट्रंप ने कोशिश की है कि अमेरिका की फौज और फॉरेन पॉलिसी को इजरायल के चंगुल से निकाल लें।
मिडिल ईस्ट के जानकार आकलन करते हैं कि इजरायल और उसकी एजेंसिया अगले २-३ दिन में पूरी कोशिश करेंगे कि किसी भी तरह से इस डील को नुकसान पहुंचाया जाए। इजरायल कुछ ऐसा करने की कोशिश करेगा कि ट्रंप के प्रतिनिधि जेनेवा जाकर भी उलटे पांव लौट आएं। इजरायल अगले दो दिनों में वेस्ट बैंक गाजा या फिर लेबनान में इतना बड़ा हमला कर देगा कि जो ईरान गुस्से में आकर कोई पलटवार करे और डील टूट जाए। इस डील से ये साफ हो गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान का है और ईरान का रहेगा। एक्सपर्ट कह रहे हैं कि वियतनाम से भी अमेरिका की बुरी हार हुई है।

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