मुख्यपृष्ठस्तंभगजबे है : टीचर आती है, मगर पढ़ाती नहीं!

गजबे है : टीचर आती है, मगर पढ़ाती नहीं!

उमा सिंह

मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी की लोकप्रिय शायरी ‘वो बुलाती है, मगर जाने का नहीं’ तो आपने जरूर सुनी होगी। यह शायरी बाद में इंटरनेट पर मीम के रूप में भी खूब वायरल हुई और इस पर कई म्यूजिक एल्बम व गाने भी रिलीज हुए। अब आप भी सोच में पड़ गए होंगे कि भला आज ‘गजबे है…’ कॉलम में हम शेरो-शायरी की बात क्यों कर रहे हैं। मामला कुछ ऐसा है कि आजकल यूपी के कुछ स्कूलों का हाल भी इससे मिलता-जुलता नजर आ रहा है, यानी टीचर तो आती हैं, लेकिन पढ़ाती नहीं..! हमीरपुर हो या लखनऊ, कानपुर हो या कौशांबी, सभी जगहों पर अब छात्र स्कूलों की समस्याओं को लेकर सामने आ रहे हैं और खुलकर प्रदेश की योगी सरकार के दावों की खुल्लमखुल्ला पोल खोल रहे हैं। उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर इन दिनों तीन अलग-अलग घटनाओं में एक साथ दिखाई दे रही है, कहीं बच्चा पढ़ाई न होने की शिकायत लेकर थाने पहुंच रहा है, कहीं बदहाल सड़क के खिलाफ हाथ में तिरंगा लेकर छात्र-छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं और कहीं शिक्षकों की कमी से परेशान स्कूली बच्चे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि बच्चे विरोध क्यों कर रहे हैं, बड़ा सवाल यह है कि आखिर व्यवस्था उन्हें इस मोड़ तक पहुंचा क्यों रही है? कानपुर देहात में कक्षा सात का १२ वर्षीय छात्र माधव मिश्रा स्कूल में पढ़ाई नहीं होने की शिकायत लेकर पुलिस चौकी पहुंच गया। उसका आरोप था कि शिक्षिका फोन पर व्यस्त रहती हैं और पढ़ाई नहीं होती। पुलिसकर्मी उसके साथ स्कूल पहुंचे तो छात्र को कथित तौर पर डांट का सामना करना पड़ा। यानी जिस उम्र में बच्चे को किताब-कॉपी लेकर कक्षा में होना चाहिए, वह न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंच रहा है। उधर हमीरपुर में सैकड़ों बच्चे और ग्रामीण हाथ में तिरंगा लेकर बदहाल सड़क के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंच गए। छात्राओं का कहना था, ‘हम भी पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहते हैं’, लेकिन सड़क ही उनकी पढ़ाई की राह रोक रही है। राजधानी लखनऊ में भी शिक्षकों की कमी और स्कूल की अव्यवस्थाओं से परेशान छात्र सड़क पर उतर आए।

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