उमा सिंह
लखनऊ के लालबाग में एक एटीएम के अंदर दो मजदूर कुछ मिनटों के लिए खड़े क्या हो गए, सोशल मीडिया पर पूरा देश गर्म हो गया। वजह कोई चोरी, लूट या तोड़-फोड़ नहीं थी। उनका `गुनाह’ सिर्फ इतना था कि वे ४५ डिग्री की तपती धूप से बचने के लिए एटीएम की ठंडी हवा में दो पल की राहत तलाश रहे थे। वीडियो में दोनों मजदूर आराम से खड़े हैं, आपस में बातें कर रहे हैं और चेहरे पर वही सुकून है, जो शायद पूरे दिन की मेहनत के बाद उन्हें पहली बार मिला होगा। लेकिन इस छोटी-सी तस्वीर ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया, क्या इस देश में गरीब आदमी के हिस्से की ठंडी हवा भी अब बैंकिंग सुविधा बनकर रह गई है?
हालात ऐसे हैं कि जिन लोगों के हाथ शहरों की इमारतें खड़ी करते हैं, उनके अपने सिर पर ऐसा ठिकाना नहीं, जहां दो मिनट चैन से बैठ सकें। जिन मजदूरों के पसीने से शहर चमकता है, उनके लिए गर्मी में राहत का इंतजाम नहीं, लेकिन एटीएम का एसी उन्हें किसी पांच सितारा होटल से कम नहीं लगता। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस वीडियो को सिर्फ वायरल नहीं किया, बल्कि व्यवस्था पर सवाल भी दाग दिए। किसी ने कहा कि सर्दियों में रैन बसेरे खुलते हैं तो गर्मियों में `कूलिंग सेंटर’ क्यों नहीं?
बेशक, एटीएम बैंकिंग सेवाओं के लिए बने हैं, विश्रामगृह नहीं। सुरक्षा और संचालन के अपने नियम हैं, जिनका पालन जरूरी है। लेकिन इससे भी बड़ा सच यह है कि जब कोई इंसान ठंडी हवा के लिए एटीएम का दरवाजा खटखटाने लगे, तो समझ लीजिए कि मौसम ही नहीं, व्यवस्था भी तप रही है।
