काशी के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद
-डॉ. बालकृष्ण मिश्र
विद्यावारिधि (पी.एच.डी-काशी)
गुरुजी, क्या मेरी लव मैरिज होगी, मेरा करियर कैसा रहेगा? -सोमेश चौधरी
(जन्म: १५ मार्च २००१, रात्रि २:१० बजे, कल्याण (पूर्व)
सोमेश जी, आपका जन्म गुरुवार के दिन अनुराधा नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है। आपकी राशि वृश्चिक बनती है। लग्न के आधार पर देखें तो आपका जन्म धनु लग्न में हुआ है। आपकी कुंडली में चंद्रमा अष्टम भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव में मंगल के साथ स्थित हैं। मंगल पंचम एवं अष्टम भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव में विराजमान हैं। यह योग संकेत देता है कि आपकी मानसिकता अपनी पसंद से विवाह करने की है तथा संभव है कि आप किसी को पसंद भी करते हों। आपकी कुंडली मांगलिक है, इसलिए जीवनसाथी का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। महादशा के अनुसार वर्तमान में बुध की महादशा में राहु का अंतर चल रहा है। अपने जीवन के विस्तृत विश्लेषण के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड बनवाया जा सकता है।
गुरुजी, मेरे जीवन में संतान सुख कैसा रहेगा, कृपया बताइए? -नमन शुक्ला
(जन्म: १ जून १९९६, दोपहर १:४५ बजे, भदोही, उत्तर प्रदेश)
नमन जी, आपका जन्म शनिवार के दिन अनुराधा नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है। आपकी राशि वृश्चिक बनती है। संतान का विचार पंचम भाव से किया जाता है। लग्न के आधार पर देखें तो आपका जन्म कन्या लग्न में हुआ है। लग्नेश बुध अष्टम भाव में स्थित हैं तथा पंचम भाव के स्वामी शनि सप्तम भाव में विराजमान हैं। पंचमेश का सप्तम भाव में होना सामान्यत: संतान प्राप्ति के योग प्रदान करता है। साथ ही केंद्र-त्रिकोण राजयोग भी बन रहा है। हालांकि, आपकी कुंडली में कुछ ऐसे संकेत भी दिखाई देते हैं, जिनके कारण गर्भधारण संबंधी बाधाएं या गर्भपात जैसी परिस्थितियों की संभावना बन सकती है। आपकी कुंडली मांगलिक भी है। आप एवं आपकी पत्नी प्रदोष व्रत रखें। आपकी कुंडली में अनंत नामक कालसर्प योग के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं, अत: उसकी वैदिक विधि से पूजा कराना लाभकारी रहेगा।
गुरुजी, मेरा वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं है। क्या किया जाए? -मनोज मौर्य
(जन्म: १७ मार्च १९९२, प्रात: ७:५५ बजे, घाटकोपर, मुंबई)
मनोज जी, आपका जन्म मंगलवार के दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है। आपकी राशि सिंह बनती है। लग्न के आधार पर देखें तो आपका जन्म कन्या लग्न में हुआ है। द्वादश भाव के स्वामी सूर्य आपकी कुंडली में सप्तम भाव में लग्नेश के साथ स्थित हैं। इस योग के कारण दांपत्य जीवन में मतभेद, अहंकार एवं आपसी गलतफहमियां बनी रह सकती हैं। सप्तम भाव में सूर्य की स्थिति तथा अन्य ग्रहयोग वैवाहिक जीवन में चुनौतियों का संकेत देते हैं। जीवन के विस्तृत विश्लेषण हेतु संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाया जा सकता है।
