जेदवी आनंद
पिछले कुछ वर्षों में कुछ कलाकारों का असमय चले जाना फैंस को खल गया। सुशांत सिंह राजपूत, सिद्धार्थ शुक्ला जैसे कुछ और भी कलाकार हैं, जिनके जाने की टीस दिलों में आज भी है। दिव्या भारती को हम आज तक नहीं भूल पाए हैं। अब इसी कड़ी में कांटा गर्ल शेफाली जरीवाला की महज ४२ साल की उम्र में निधन ने उनके फैंस को झकझोर कर रख दिया है, जबकि देखा जाए तो शेफाली जरीवाला के हिस्से में सुशांत सिंह राजपूत, सिद्धार्थ शुक्ला, दिव्या भारती की तरह लंबे काम की फेहरिस्त भी नहीं थी।
शेफाली जरीवाला बेशक कुछ और भी छोटे-बड़े प्रोजेक्ट की हिस्सा बनी, लेकिन उसकी पहचान सिर्फ एक रीमिक्स एल्बम कांटा लगा से ही थी। लेकिन ये पहचान एक मुक्कमल पहचान थी, जिसकी वजह से वो अपने फैंस की चहेती बन गई थी। शेफाली जरीवाला के हिस्से में कांटा लगा रीमिक्स एल्बम ठीक उसी प्रकार था, जैसे अमजद खान खान के हिस्से में फिल्म शोले थी। अगर अमजद खान ने शोले फिल्म के बाद कुछ और नहीं भी किया होता तो भी उतने ही लोकप्रिय और अमर होते, जितने आज हैं।
सिर्फ एक एल्बम से वो आज भी सबके दिलों में छाई हुई थी और छाई रहेगी। यही वजह है कि उसके अचानक चले जाने की खबर ने उनके चाहने वालों को स्तब्ध कर दिया। कई बॉलीवुड सितारों और सोशल मीडिया पर जितने भी लोगों ने पोस्ट किया, सभी के पोस्ट में एक बेचैनी थी, मायूसी थी, अफसोस था, एक आह का अहसास था। बेशक वो आगे कुछ और काम नहीं कर पाती, लेकिन सबको ये अफसोस हो रहा था कि अभी नहीं जाना चाहिए था। उसकी अंतिम दर्शन के लिए भी जितने बॉलीवुड सितारे पहुंचे, उससे ये अहसास जरूर हुआ कि बॉलीवुड को भी उसका जाना खल गया। ये उसके एक एल्बम से कमाई हुई लोकप्रियता थी, जिसका मलाल सबको है।
हो भी क्यों न, 29 अगस्त 2002 का वो दिन जब एक लड़की रातों-रात इंडिया की पहली वायरल सेलिब्रिटी बनी थी। न उस वक्त इंस्टाग्राम था, न फेसबुक था, न रील्स का जमाना था, न शॉर्ट्स वीडियो का। बस एक गाना था कांटा लगा और चेहरा था शेफाली जरीवाला का। जिस दिन ये गाना रिलीज हुआ, उस दिन जैसे दर्शक टी वी स्क्रीन से चिपक गए थे। सबके लिए ये एक अचंभित करने वाला गाना था। जादू था-नशा था, जो फौरन सर पर चढ़ गया।
संगीत की दुनिया में रिमिक्स ने तभी जन्म ही लिया था, लेकिन सच कहा जाए तो हैरी आनंद के निर्देशन में बने इस एल्बम ने रीमिक्स को एक झटके में परवान दे दिया और फलक पर छा गई शेफाली जरीवाला। करोड़ों दिलों की रातों-रात धड़कन बन गई। अगर ये कहा जाए कि ओल्ड वर्जन की लोकप्रियता इस रीमिक्स से और बढ़ गई तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। संगीत की दुनिया में ये रीमिक्स एक आंदोलन की तरह था। ये एक पॉप कल्चर रिवॉल्यूशन की तरह था।
शेफाली जरीवाला के बोल्ड लुक ने फैंस को दीवाना बना दिया था। टैटू, चोटियां फैशन का हिस्सा बन गया। कॉलेज में लड़कियां वैसे ही टैटू और चोटियां बनाकर घूमने लगीं। पैरेंट्स ने कहना शुरू कर दिया कि ये क्या फैशन है। चौक-चौराहे, रिक्शा में, दुकानों में बस एक ही गाना था कांटा लगा। शेफाली जरीवाला ने एक ही गाने से इतिहास रच दिया था, फिर उसने बिग बॉस में भी शिरकत की और वहां भी उसने बाजार लूटा।
शेफाली जरीवाला आज हमारे बीच नहीं हैं। उनका जाना फैंस को वैसा ही लग रहा है, जैसे दिल में कांटा लगा गई हों। जिसकी चुभन हमेशा बनी रहेगी, लेकिन सच ये भी है कि फैंस के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी। जब तक फैंस हैं गाना है कांटा लगता रहेगा।
