सामना संवाददाता / सुल्तानपुर
-तपती धूप और गर्मी पर हावी रहा आस्था व विश्वास।
-आधी रात से ही आदि गंगा के तट पर ‘हर-हर गंगे’ व ‘जय गोमती मैय्या’ की गूंज
भगवान श्रीराम के पुत्र महाराज कुश की बसाई नगरी का आदि गंगा गोमती के तट पर स्थित महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है धोपाप। मान्यता है कि गोमती के इसी तट पर अयोध्या के राजा श्रीराम ने रावण वध के बाद ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति के लिए इसी धोपाप घाट पर डुबकी लगाई थी। तभी से प्रत्येक गंगा दशहरा पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान, ध्यान और दान करते आ रहे हैं।
इस बार भी मंगलवार को आदि गंगा गोमती में गंगा दशहरा पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। परंपरा के मुताबिक पूजन, अन्नदान और गोदान में भी श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। रविवार से ही जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल धोपाप धाम की तरफ श्रद्धालुओं का रेला चल पड़ा था। रविवार रात पहुंचे लोगों ने सोमवार को भी नदी में स्नान किया।
बीती आधी रात धोपाप में आदि गंगा गोमती के पावन तट पर डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हुआ, जो मंगलवार देर शाम तक जारी रहा। लोगों ने गोमती नदी में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। रविवार शाम से ही श्रद्धालुओं का रेला धोपाप की ओर चल पड़ा था। दुकानदार व याचक अपनी जगह सुरक्षित करने के लिए तीन दिन पहले ही पहुंच गए थे। आसपास के जिलों ही नहीं, बल्कि दूरदराज के जिलों से भी श्रद्धालु मेले में पहुंचे थे।
दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने रात्रि विश्राम के बाद आदि गंगा में डुबकी लगाई। यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। श्रद्धालुओं ने आदि गंगा गोमती में स्नान के बाद घाट पर ही पूजन-अर्चन किया। बुजुर्गों ने गोदान व अन्नदान की परंपरा का भी निर्वहन किया। याचकों की भीड़ बोरी भर-भरकर अनाज पाकर निहाल हो गई।
बाद में श्रद्धालुओं की भीड़ ने टीले पर मौजूद श्रीराम जानकी मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया। धार्मिक क्रियाकलापों से निवृत्त होकर श्रद्धालुओं ने मेले में रोजमर्रा की जरूरत के सामान व श्रृंगार सामग्री की खरीदारी भी की। इसके अलावा महिलाओं की भीड़ चाट और मिठाई की दुकानों पर भी जमा रही।
