लखनऊ में बारिश ने सरकार के दावों की ऐसी पोल खोली कि सत्ता के सबसे सुरक्षित ठिकाने भी नहीं बच पाए। जिन गलियों और मोहल्लों में जलभराव की शिकायतें आम लोगों की मजबूरी बन चुकी थीं, अब वही गंदा और बदबूदार ड्रेनेज का पानी सीधे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास तक पहुंच गया। सवाल सिर्फ एक घर में पानी भरने का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जो हर साल मानसून से पहले तैयारियों के बड़े-बड़े दावे करती है। जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री का आवास ही सीवर और ड्रेनेज के पानी से नहीं बच पाया, तो आम जनता की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
बता दें कि सात कालिदास मार्ग स्थित डिप्टी सीएम आवास में पिछले एक सप्ताह के भीतर कई बार सीवर का पानी भर चुका है। १२ जून को पहली बार लॉन में गंदा पानी घुसा था। नगर निगम की टीम आई, पानी निकाला, आश्वासन दिया और चली गई। अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया, लेकिन स्थायी समाधान का वादा कागजों तक ही सीमित रहा। नतीजा, मंगलवार को फिर वही हालात पैदा हो गए और लॉन में सीवर का गंदा पानी जमा हो गया। बार-बार हो रही इस लापरवाही से नाराज उपमुख्यमंत्री के निजी सचिव ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। पत्र में साफ कहा गया है कि पहले सूचना देने और आश्वासन मिलने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
करोड़ों रुपए बहे, लेकिन समस्या जस की तस
सबसे बड़ा सवाल उन दावों पर है, जिनमें ४६३ करोड़ रुपए के ड्रेनेज प्रोजेक्ट, १२०० से अधिक नालों की सफाई और जलभराव मुक्त लखनऊ का वादा किया गया था। अगर करोड़ों की योजनाओं के बावजूद डिप्टी सीएम का आवास ही सुरक्षित नहीं रह पाया, तो फिर राजधानी के आम नागरिकों को राहत वैâसे मिलेगी? यह सिर्फ जलभराव नहीं, बल्कि व्यवस्था पर लगा बड़ा सवालिया निशान है।
