मुख्यपृष्ठस्तंभमहाराष्ट्रनामा : ‘मुंबई की BEST बनी ‘बेस्ट', मगर यात्री बन गए टेस्ट!'

महाराष्ट्रनामा : ‘मुंबई की BEST बनी ‘बेस्ट’, मगर यात्री बन गए टेस्ट!’

राजन पारकर

मुंबई वह शहर जो कभी सोता नहीं था, आज खुद सवालों के सामने खड़ा है। कहीं ँEएऊ की बसें खड़ी हैं, कहीं जनता खड़ी है और कहीं विकास के बड़े-बड़े सपने खड़े किए जा रहे हैं। मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली ँEएऊ की बसें जब सड़कों से गायब हुर्इं तो लाखों मुंबईकरों की रफ्तार भी थम गई। कर्मचारी अपनी पुरानी मांगों की फाइल लेकर मैदान में उतरे, प्रशासन ने चर्चा और विचार का पुराना हथियार निकाल लिया और बीच में आम आदमी फिर वही, हाथ में टिकट और आंखों में इंतजार! मुंबईकर ऑफिस जाने के लिए निकला था, तभी रास्ते में उसे लोकतंत्र का लाइव प्रदर्शन देखने को मिला। बस नहीं आई, लेकिन परेशानी समय पर पहुंच गई! टैक्सी और रिक्शा वालों की कतारें बढ़ीं और जनता ने फिर पूछा, ‘साहब, शहर की रफ्तार किसके भरोसे चल रही है?’
‘डेटा सेंटर की रोशनी चमकेगी, मगर ठाणेकरों के घरों में बिन पानी सब सून’
ठाणे में विकास के नाम पर एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। डेटा सेंटर आएगा, डिजिटल युग आएगा, रोजगार आएगा, ऐसी घोषणाएं गूंज रही हैं, लेकिन जनता का सवाल सीधा है,‘साहब, डेटा बचाने से पहले हमारा पानी, हवा और भविष्य तो बचाइए!’ कुछ लोगों के लिए यह डिजिटल क्रांति होगी, लेकिन आम नागरिक के लिए यह जीवन का सवाल है। क्योंकि शहरों में बड़ी इमारतें खड़ी हो जाती हैं, बड़े प्रोजेक्ट आ जाते हैं पर अंत में धूप में खड़ा वही आम आदमी रहता है।
एक तरफ कर्मचारी अपने अधिकार मांग रहे हैं, दूसरी तरफ विकास के सपने दिखाए जा रहे हैं और बीच में जनता खड़ी है, जिसके पास न जादुई गैजेट है, न कोई सर्वर… सिर्फ उम्मीद है। स्थिति ऐसी हो गई है कि ‘समस्याएं पुरानी हैं, घोषणाएं नई है, लेकिन तकलीफ हमेशा जनता की ही है।’ ‘महाराष्ट्र में अब दो चीजें सबसे तेज दौड़ रही हैं, खबरें और आश्वासन… बाकी जनता अभी भी लाइन में खड़ी है!’
‘डोरेमोन लौट रहा है, लेकिन शहर की समस्याओं के लिए उसकी जादुई जेब कहां है?’
बीस साल बाद डोरेमोन बड़े पर्दे पर लौट रहा है। बच्चे खुश हैं, पुराने किस्से याद आ रहे हैं और मनोरंजन की दुनिया में उत्साह है, लेकिन सवाल यह है, नोबिता की गलतियां सुधारने वाला डोरेमोन अगर सच में आ जाए, तो क्या वह हमारी व्यवस्था की गलतियां भी सुधार पाएगा? क्या उसकी जादुई जेब से निकलेगा कोई ऐसा गैजेट जो भ्रष्टाचार रोक दे? कोई ऐसा यंत्र जो जनता की परेशानी खत्म कर दे? क्योंकि आज शहरों को सिर्फ कार्टून का जादू नहीं, असली समाधान चाहिए।

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