राजन पारकर
महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय खुल गया है। समान नागरिक कानून की चर्चा ने फिर जोर पकड़ लिया है। सरकार ने समिति बनाने का एलान किया है और जनता को बताया गया है कि अब न्याय का नया सूरज उगने वाला है, लेकिन लोकतंत्र की पुरानी कहानी भी कुछ ऐसी ही है कि पहले समिति बनती है, फिर बैठक होती है, फिर मसौदा तैयार होता है और फिर जनता पूछती है, ‘साहब, कानून आया या अभी फाइलों में ही तीर्थयात्रा कर रहा है?’ निवृत्त न्यायाधीश मसौदा तैयार करेंगे, बहुविवाह जैसे मुद्दे भी इसमें शामिल होंगे। अब देखना यह है कि कानून समानता लाता है या फिर सिर्फ राजनीतिक भाषणों का नया अध्याय बनकर रह जाता है।
‘रिश्तों की शादी थी या साजिश की पटकथा?
भरोसे की बारात रास्ते में ही लुट गई!’
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल प्रकरण ने रिश्तों की चमकदार दुनिया के पीछे छिपे अंधेरे सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों की शादी की तैयारी, उदयपुर का महल, हवाई जहाजों की बुकिंग, सब कुछ किसी फिल्मी कहानी जैसा था। लेकिन कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि खुशियों की शहनाई की जगह जांच की घंटियां बजने लगीं। पुलिस जांच में सामने आई जानकारी ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आज रिश्तों की चमक के पीछे भरोसा कितना सुरक्षित है। जहां सात जन्मों के वादे होने वाले थे, वहां आरोपों की ऐसी खाई खुली कि पूरा समाज हैरान रह गया।
‘जमीनों का इतिहास पुराना, मगर समाधान की फाइल अभी भी जवान!’
महाराष्ट्र में देवस्थान इनाम जमीनों के लिए नया कानून बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। वर्षों से चले आ रहे विवादों को खत्म करने के लिए समिति ने कदम बढ़ाया है। मगर सरकारी गलियारों की अपनी एक रफ्तार होती है, समस्या बूढ़ी हो जाती है, लेकिन फाइलें हमेशा जवान रहती हैं। अब कहा जा रहा है कि नया कानून ऐतिहासिक होगा, सबको न्याय देगा और पुराने विवादों का अंत करेगा। जनता भी यही उम्मीद कर रही है कि इस बार कानून सिर्फ कागज पर इतिहास नहीं बनाएगा, बल्कि जमीन पर भी राहत लेकर आएगा।
