मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति सरकार का  आर्थिक संतुलन बिगड़ा

महायुति सरकार का  आर्थिक संतुलन बिगड़ा

-गरीब और उपेक्षित समाज पर हो रहा अन्याय

-विपक्ष ने लगाया गंभीर आरोप

सामना संवाददाता / मुंबई

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार का आर्थिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में गरीब और उपेक्षित वर्गों पर अन्याय बढ़ गया है। इस तरह का आरोप राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील ने कल लगाया।
विधानसभा का मानसून सत्र कल से शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन उप मुख्यमंत्री व वित्तमंत्री अजीत पवार ने ५७,५०९ करोड़ रुपए की अनुपूरक मांगें पेश कीं।
इस पर पूर्व वित्त मंत्री व राकांपा गुट के नेता जयंत पाटील ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब सरकार के लिए बजट का संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो गया है। इससे राज्य पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। वर्तमान स्थिति में राज्य का आर्थिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया है, जिससे गरीब और उपेक्षित समाज के साथ अन्याय हो रहा है।
दो लाख करोड़ तक जा सकता है राजस्व घाटा
जयंत पाटील ने कहा कि आगे शीतकालीन सत्र आनेवाला है और उसके बाद अगला बजट पेश किया जाएगा। उससे पहले भी एक और अनुपूरक मांग लाई जाएगी। इसका मतलब है कि यह सरकार राज्य का राजस्व घाटा डेढ़ से दो लाख करोड़ तक पहुंचा देगी। इसका अर्थ यह है कि सरकार को सारे आंकड़े केवल कागजों पर दिखाने हैं, वरना जिनसे पैसे लिए गए हैं या जिनका भुगतान बाकी है, वे या तो आत्महत्या करेंगे या सरकार के पीछे पड़ जाएंगे। इसलिए सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति को इतने बड़े घाटे की ओर ले जाने का दुस्साहस किया है

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