डॉ. ममता शशि झा, मुंबई
रीना एक भोर स विभिन्न प्रकार के खेनाई बनबई छलि। आई पितर पक्षमे हुनकर ससुर के तिथि छलनि। खाय-पिबे के ससुर बहुत शौकीन छलखिन।
घरक बाकी बेटा-पुतहू ते अपन उपस्थितियेमे कर्तव्य निर्वहन बूझि जाय छलखिन। एक त क्यो गोटे किछु करइ नहिं जाय छलखिन, उपर सँ छोटकी दयादनी आ दयोर के अनढ़नक टिप्पणि जे ‘हम सब अहिमे विश्वास नहिं करई छी, एत खुएला स हुनका सब लग पहुँचि जेतनि से सोचिए के हमरा हँसि लगइया’ अहि तरहक गप्प सुनि के रीना के मोन माहुर भे जाइ छलनि। मोने मोन सोचई छलि जे अहाँ सब ते माय-पिता के अस्तित्वेमे विश्वास नहिं करई छलियनि। ने जिबतिमे किछु केलियनि आ ने आब किछु कर चाहइ छियनि।
रीना ओलक चटनीमे नेबोके रस देब काल सोचइ छलि जे इहे दयोर आ दयादनी जहन रुद्राभिषेक कर कालमे तरह-तरह के रस आ दुध चढ़बइत रहइ छथिन ते एक्कहु बेर मोनमे नहिं अबइ छनि जे इ सब चीज देवता लग कोना पहुँचि जेतनि। ओहिमे बड़ मोन लगई छलनि, कियेक तऽ सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट के के लोकसबहक बीचमे अपन नीक छबि देखेबाक रहइ छनि। सासु-ससुर के छोटका बेटा-पुतहू पर बड़ सीनेह छलनि मुदा हुनका सबके सासु-ससुर के उपस्थिति सँ शेड्यूल खराब भे जाय छलनि। आ छोटका दयादनी के ते वृद्ध लोकसबहक संगे रहनाई ओल्ड पैâशन बुझाई छलनि। हुनकर सबहक जे संगी-साथी सब अपन माय-पिता के संगे रहई छलखिन हुनका सबके ओ कूल नहिं बुझई छलखिन। कियेक त ओ सब पैघ लोकक आगुमे मान-मर्यादा सँ रहई जाय छलखिन। साग भुज काल मोन पड़ि गेलनि जे छोटका पोता के जनमदिन के पार्टीमे छोटकी दयादनी रीना के फोन के, के कहने रहथिन जे हुनका सासु-ससुर के लेल घरे पर खेनाई पठा दइ छियनि, कियेक ते पार्टी के थीम वेस्टर्न छई आ ओ सब ओहिमे थीममे फिट नहिं बैसथिन। ई गप्प सुनि के दुनु गोटे के बड़ तकलिफ भेल छलनि, ससुर ऐतबे बाजल छलाह जे खेबाक लेल थोड़े जेबाक अछि, सबसँ भेंट होयत ताहि लेल जाय के मोन अछि! किछु नहिं कहियउन पठाब लेल साग आ ओल के चटनी बना दिय, दालि-भात संगे नीक लगइया। रीना के मोन पड़ि गेलनि जे सासु के स्वर्ग गेला पर हुनकर गहना सब ट्रेडिशनल लुकबला ज्वेलरी हमरा बड़ पसंद अछि कहिके ससुरजी सँ लॉकरके चाभी मांग लेल मच्छामाछ के पराते आयल छलखिन। इ सब सोचिते काल रीना ठानि लेलथि जे क्यो हुनकर पितरक आस्था पर प्रश्न करथिन्ह, हुनका सबहक देवताके प्रति आस्था पर ओ प्रश्न करथिन्ह!
