-गंडोला का केबल टूटने से हुई थी भयंकर त्रासदी
-भारी बर्फबारी और खराब मौसम से राहत कार्य में पड़ी बाधा
सामना संवाददाता / श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में कल सोमवार को एक बड़ा हादसा हो गया। गुलमर्ग गंडोला केबल कार सर्विस (रोपवे) में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे करीब ६०० पर्यटक कई घंटों तक ऊपर आसमान में लटके रहे। इस दौरान ऊपर फंसे पर्यटक मदद के लिए चिल्लाते रहे।
घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। खबर लिखे जाने तक देर रात सभी पर्यटकों को बचा लिया गया था। हालांकि, इस दौरान खराब मौसम और बर्फबारी के कारण राहत व बचाव कार्य में बाधा भी आई।
अधिकारियों के अनुसार, गुलमर्ग गंडोला सर्विस के दोनों चरणों का संचालन तकनीकी खराबी के बाद रोक दिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। सेना, पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की संयुक्त टीमों ने युद्धस्तर पर बचाव कार्य चलाया और सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
६५ केबिन बीच में फंसे
सेना ने बताया कि इस दौरान कुल ६५ केबिन बीच रास्ते में फंस गए थे। चिनार कोर की मदद से तेजी से राहत और बचाव अभियान चलाया गया। फिलहाल केबल कार सिस्टम को फिर से बहाल करने का काम जारी है।
सभी पर्यटक सुरक्षित
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि सभी केबिन सुरक्षित हैं और प्रशिक्षित टीमें पर्यटकों को सुरक्षित निकालने में जुटी हुई हैं।
७ पर्यटकों की हुई थी मौत!
गुलमर्ग में कल गंडोला खराब हो गया था। मगर इस बार किसी जान-माल की हानि नहीं हुई। मगर २०१७ में जब गंडोला में हादसा हुआ था तो उस वक्त सात पर्यटकों की मौत हो गई थी। २५ जून २०१७ को वह बड़ा हादसा हुआ था, जब तेज हवाओं के कारण एक पेड़ केबिन पर गिर गया था। पिछले साल जनवरी में भी तकनीकी कारणों से इस सेवा को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था। कल हादसे के बाद सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि उन्होंने डीजीपी नलिन प्रभात को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य की निगरानी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि पुलिस, सेना, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं।
पूर्व में हुए प्रमुख हादसे
१० अप्रैल २०२२ को देवघर रोपवे का हादसा हुआ था। तकनीकी खराबी और ट्रॉलियों के आपस में टकराने से यह हादसा हुआ था। करीब ४८ लोग हवा में लटक गए थे। सेना, वायुसेना और एनडीआरएफ ने मिलकर राहत और बचाव कार्य चलाया था, लेकिन इस घटना में ३ लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह २०११ में टिहरी गढ़वाल में नव निर्मित रोपवे का ट्रायल चल रहा था, तभी एक तकनीकी खराबी के कारण ट्रॉली अचानक नीचे गिर गई। इस हादसे में २ लोगों की मौत हो गई थी और कुछ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसी तरह वर्ष २००५ दिल्ली स्थित कालकाजी मंदिर में भारी वजन और क्षमता से अधिक लोगों के बैठने के कारण रोपवे का ट्रैक टूट गया था। इस हादसे में १ महिला की मौत हो गई थी और लगभग ६ लोग घायल हुए थे।
