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कडोंमपा कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही उजागर … कोरोना काल की दवाइयों को लैंडफिल में फेंका गया! …मनपा आयुक्त ने दिए जांच के आदेश

सामना संवाददाता / मुंबई
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग के पास दो ट्रक भरने लायक फेविपिराविर टैबलेट का स्टॉक था, जिसे मनपा के वरिष्ठों की मंजूरी लिए बिना कनिष्ठ कर्मचारियों ने कल्याण के उंबर्डे स्थित बायोमेडिकल वेस्ट निपटान केंद्र में पहुंचा दिया। हालांकि निपटान केंद्र के कर्मचारियों ने मनपा के वरिष्ठों की मंजूरी के बिना इन दवाओं का निपटान करने से इनकार कर दिया। इससे स्वास्थ्य विभाग में नई गड़बड़ी उजागर हुई है। मनपा आयुक्त अभिनव गोयल ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के उपायुक्त प्रसाद बोरकर को मामले की जांच करने का आदेश दिया है।
उपायुक्त बोरकर ने डोंबिवली के गरीबचापाडा औषधि भंडारण केंद्र के प्रमुख फार्मासिस्ट भोजराज भगत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ये फेविपिराविर टैबलेट कोरोना महामारी के दौरान वर्ष २०२१ के हैं। इन टैबलेट की एक्सपायरी डेट २०२३ है। कोरोना महामारी के दौरान सरकार कुछ दवाएं खरीदकर मनपाओं को उपलब्ध करा रही थी। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि दो साल पहले एक्सपायरी डेट के बाद भी इन गोलियों का निपटान क्यों नहीं किया गया। मनपा के मुख्य लेखा-परीक्षक ने स्वास्थ्य विभाग को निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर इन एक्सपायर गोलियों का निपटान करने के निर्देश दिए थे। दवा भंडारण कक्ष के प्रमुख को इस स्टॉक के बारे में चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को सूचित करना और वरिष्ठों के निर्देशानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन गोलियों को बायोमेडिकल वेस्ट निपटान केंद्र पर ले जाना अनिवार्य था। वरिष्ठों की अनुमति लिए बिना इन एक्सपायर हो चुकी दवाओं को उंबर्डे स्थित बायोमेडिकल वेस्ट निपटान केंद्र पर ले जाने से मामला जांच के चरण में अटक गया है। आयुक्त गोयल के आदेश पर उपायुक्त बोरकर ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना को सबसे पहले सामाजिक कार्यकर्ता गणेश ताटे और रूपेश भोईर के संज्ञान में आया। उन्होंने आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।

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