मुंबई। सोलफुल म्यूज़िक के किंग पापोन के हालिया गाने मेट्रो इन दिनों श्रोताओं के दिल को गहराई से छू रहे हैं और सबसे अहम यह कि ये गाने उनके गजलों के प्रति लंबे समय से चले आ रहे प्रेम को एक बार फिर मजबूती से साबित करते हैं। याद, होते तक, कैदे से फिल्म वर्जन, दस हासिल सौ बाकी और मौसम – मूड शिफ्ट जैसे गीतों में पापोन ने वह मेलोडी दी है जिसमें भावनाओं की गहराई, शायरी और शास्त्रीय संवेदनशीलता नजर आती है और यही सब गजल की असली आत्मा है।
क़ैदे से और याद खास तौर पर पारंपरिक गजलों की गहराई और ढांचे को अपने अंदर समेटे हुए हैं, जिन्हें आधुनिक अंदाज में पेश किया गया है। प्रीतम द्वारा संगीतबद्ध और सईद कादरी द्वारा लिखे गए इन गीतों में पापोन ने हर शब्द और सुर को अंतरंगता और मायने दिए हैं। जिससे साफ होता है कि गजल उनके लिए सिर्फ़ एक शैली नहीं, बल्कि एक ऐसा रूप है जिसे वह पूरी तरह जीते हैं।
लेकिन यह पापोन के लिए नया नहीं है। मेट्रो इन दिनों से पहले भी वे अपने एक्सक्लूसिव कॉन्सर्ट सीरीज़ शाम-ए-महफ़िल विद पापोन में ग़ज़लें पेश करते रहे हैं। इन शो के ज़रिए उन्होंने ग़ज़लों की शायरी और गहराई को नए संगीतात्मक अंदाज के साथ तलाशा और प्रस्तुत किया है। उनकी मौजूदगी जश्न-ए-रेख़्ता जैसे प्रतिष्ठित उर्दू साहित्य महोत्सव में भी ग़ज़लों पर उनकी पकड़ को सामने लाती है, जहां उनकी परफ़ॉर्मेंस ने श्रोताओं को भावुक और मंत्रमुग्ध कर दिया था।
मेट्रो इन दिनों के गानों को मिली व्यापक सराहना के बाद अब पापोन के आने वाले ग़ज़ल एल्बम को लेकर उत्साह बढ़ गया है। भले ही इसके आधिकारिक विवरण अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन प्रशंसक पहले से ही उस दिल से गाए गए और संगीत से भरपूर प्रोजेक्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। शायरी, धुन और मूड की उनकी सहज समझ को देखते हुए उम्मीदें बहुत ऊंची हैं और अगर उनके हालिया काम को आधार माना जाए, तो यह एल्बम गजलों को नई पीढ़ी के लिए अनुभव करने का एक बिल्कुल नया अंदाज़ दे सकता है।
