मुख्यपृष्ठसमाचारमिल मजदूरों को उनका घर मिलना चाहिए

मिल मजदूरों को उनका घर मिलना चाहिए

 रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई 

मुंबई में जब से कपड़ा की मिलें बंद हुई हैं, तब से वहां कामगारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। वे अपने हक की लडाई के लिए दर दर भटक रहे हैं। कामगार नेता अनिल गणाचार्य चिंचपोकली में आयोजित एक कार्यक्रम में अपना यह विचार व्यक्त किया। वे कामरेड गुलाबराव गणाचार्य की 52वीं स्मृति दिन के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मिल कामगारों के हित के लिए कामरेड ने अनेकों लड़ाइयां लड़ी। डेढ़ लाख मिल कामगारों ने अपने घर के लिए सरकार को आवेदन दिया था, जिसमें मात्र 15 हजार लोगों को ही मकान उपलब्ध हो सका है। मिल मालिक बिल्डरों का साथ दे रहे हैं। गरीब मजदूरों का सुनने वाला कोई नहीं। उन्होंने कहा कि साने गुरुजी के शिष्य गुलाबराव गणाचार्य महात्मा गांधी का साथ देने के लिए अपनी सरकारी नौकरी त्याग दी थी और 1942 में अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन में अरुणा आसफ अली के साथ काम किया। वे गोवा मुक्ति आंदोलन तथा संयुक्त महाराष्ट्र के आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर बेस्ट कामगार नेता व पूर्व नगर सेवक सुनील गणाचार्य ने कहा कि श्री गुलाबराव गणाचार्य 1957, तथा 1963 में नगरसेवक बने। दो वर्ष मुंबई मनपा में विरोधी पक्ष के नेता रहे। कामरेड गुलाबराव गणाचार्य के अभिवादन अवसर पर स्थानीय नगर सेवक श्री लोखंडे, कां अशोक कुट्टी, कां बाबा सावंत, कम्यूनिस्ट महिला फेडरेशन अध्यक्ष अनुराधा रेड्डी, मुंबई मिल कामगार यूनियन के एडवोकेट निंबालकर तथा सभी पक्ष के नेता उपस्थित थे। इस अवसर पर कां गणाचार्य अमर रहे के नारे भी लगाए गए।

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