भाजपा के `तानाशाही’ रवैए पर कांग्रेस ने साधा निशाना
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
केंद्र की मोदी सरकार को विपक्ष पहले से `तानाशाही’ होने का आरोप लगाते आ रहा है। तमाम मामलों में केंद्र की मोदी सरकार के रवैया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब बिहार चुनाव में एक बार फिर भाजपा तानाशाही रवैया को लेकर सुर्खियों में है। दरअसल, मुजफ्फरपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से पहले प्रशासन ने ६ पत्रकारों को नजरबंद यानी हाउस अरेस्ट कर दिया और इसके बाद राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि मोदी सरकार अब उन पत्रकारों से डरने लगी है, जो सच दिखाने की हिम्मत रखते हैं।
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने सवाल उठाया कि आखिर नरेंद्र मोदी उन पत्रकारों से इतना डरते क्यों हैं, जो असलियत जनता तक पहुंचाते हैं? प्रधानमंत्री सिर्फ उन लोगों को इंटरव्यू देते हैं, जो पूछते हैं ‘आप थकते क्यों नहीं?’, ‘आप कौन-सा टॉनिक पीते हैं?’ या ‘आप जेब में बटुआ रखते हैं क्या?’ लेकिन जो पत्रकार असली मुद्दे उठाते हैं, मजदूरों की आवाज दिखाते हैं, उन्हें सरकार नजरबंद कर देती है। जानकारी के मुताबिक, रैली स्थल के पास चीनी मिल के मजदूर कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे। स्थानीय पत्रकार इस विरोध प्रदर्शन की कवरेज करने जा रहे थे, लेकिन रैली से पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार को डर था कि अगर मजदूरों की आवाज जनता तक पहुंच गई, तो माहौल बदल जाएगा।
कांग्रेस के सवाल
नरेंद्र मोदी किस बात से डरते हैं?
क्या लोकतंत्र में सवाल नहीं पूछे जाएंगे?
क्या प्रशासन तय करेगा कि मीडिया कहां दिखेगा और कहां नहीं?
क्या सरकारें तय करेंगी क्या दिखाया जाएगा और क्या नहीं?
पत्रकारों के अधिकारों
को कुचल रही मोदी सरकार
कांग्रेस नेता व प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ कहा गया है। सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछना मीडिया का अधिकार है, लेकिन मोदी सरकार अब उस अधिकार को कुचल रही है। कांग्रेस पार्टी निर्भीक पत्रकारों के साथ खड़ी है। उनके सवाल पूछने के अधिकार की रक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी किस बात से डरते हैं? क्या लोकतंत्र में अब सवाल पूछना अपराध बन गया है? क्या प्रशासन तय करेगा कि मीडिया क्या दिखाएगा क्या नहीं? क्या सरकारें यह तय करेंगी कि जनता को क्या दिखाना है और क्या नहीं?
