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‘मम्मी-पापा, आप मुझे बचाने क्यों नहीं आए?’ … ६० घंटे मौत के मलबे में अकेली रही मासूम, धीमी आवाज ने बचा ली जिंदगी

चारों तरफ मिट्टी, पत्थर और टूटे मकानों का ढेर। ऊपर से इतनी मोटी परत कि बाहर की दुनिया का कोई पता नहीं। खाने को कुछ नहीं, पीने को पानी नहीं और मां-बाप भी पास नहीं। नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच मासूम मनीषा करीब ६० घंटे तक इसी भयावह स्थिति में जिंदगी से लड़ती रही। और जब आखिरकार उसे मलबे से निकालकर मां-बाप से मिलाया गया तो उसका मासूम सवाल था, ‘मैं मम्मी और पापा को बुलाती रही, आप मुझे बचाने क्यों नहीं आए?’
नेपाल में २६ अगस्त को आई विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ ने टिमुरे और आसपास के इलाकों को देखते ही देखते तबाह कर दिया था। मनीषा अपने घर में थी, जबकि उसकी मां गीता काम पर और पिता लोक बहादुर घर के बाहर थे। पानी और मलबे का सैलाब इतनी तेजी से आया कि कुछ ही सेकंड में पूरा मकान बह गया। माता-पिता को लगा कि उनकी बेटी अब जीवित नहीं होगी।
बाढ़ से बची मनीषा
बचाव का वीडियो भी बेहद भावुक करने वाला है। कीचड़ और धूल से ढंकी बच्ची के चेहरे और शरीर पर चोटें थीं। जवानों ने उसे सावधानी से बाहर निकाला, कंबल पर लिटाया और चम्मच से थोड़ा-थोड़ा भोजन तथा पानी देना शुरू किया। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया। हालत स्थिर होने के बाद मनीषा को उसके माता-पिता से मिलाया गया। मां गीता ने बताया कि बेटी बार-बार उस भयावह क्षण को याद करती है। उसका कहना था कि बाढ़ उसे बहाकर ले गई और वह लगातार ‘मम्मी-पापा पुकारती रही।

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