मुख्यपृष्ठस्तंभदुनिया में अस्थमा से हर साल साढ़े चार लाख से अधिक मौतें

दुनिया में अस्थमा से हर साल साढ़े चार लाख से अधिक मौतें

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में बाल रोग विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम के तहत रंग भराई प्रतियोगिता, म्यूजिकल चेयर, लेमन एंड स्पून रेस तथा डांस प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
खास बातें
* इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स से अस्थमा नियंत्रित होता है : प्रो. प्रीथपाल सिंह
* शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बच्चे अस्थमा से पीड़ित : डॉ. रूपा राज
* इनहेल्ड दवाओं की सीमित पहुंच मौतों का मुख्य कारण : प्रो. चिदंबरम
* केवल ब्रोन्कोडायलेटर्स से सूजन पूरी तरह ठीक नहीं होती
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में बाल रोग विभाग की ओर से फैकल्टी और पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत रंग भराई प्रतियोगिता, म्यूजिकल चेयर, लेमन एंड स्पून रेस तथा डांस प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (जीआईएनए) द्वारा विश्व अस्थमा दिवस-2026 की थीम “अस्थमा से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति के लिए एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर्स तक पहुंच—अब भी एक गंभीर आवश्यकता” रखी गई।
मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल एवं फार्माकोलॉजी विभाग के एचओडी प्रो. प्रीथपाल सिंह मटरेजा ने अस्थमा के इलाज में इनहेल्ड ब्रोन्कोडायलेटर्स के साथ इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स को शामिल करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इनहेल्ड ब्रोन्कोडायलेटर्स सिकुड़े हुए छोटे एयरवे को फैलाने का कार्य करते हैं। अस्थमा एक पुरानी सूजन संबंधी बीमारी है, इसलिए केवल ब्रोन्कोडायलेटर्स से उपचार करने पर सूजन पूरी तरह ठीक नहीं होती। इसी कारण ब्रोन्कोडायलेटर्स के साथ इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स को जोड़ने से बीमारी नियंत्रित रहती है, इसके दोबारा होने की संभावना कम होती है तथा वायुमार्ग को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
बाल रोग विभाग की एचओडी डॉ. रूपा राज भंडारी सिंह ने बचपन में होने वाले अस्थमा पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह धारणा गलत है कि बच्चों में अस्थमा दुर्लभ होता है। वास्तव में, दुनिया भर में विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बच्चे अस्थमा से पीड़ित पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में होने वाले अस्थमा के कई जोखिम कारक होते हैं। अस्थमा उन पुरानी गैर-संचारी बीमारियों में शामिल है, जो विश्वभर में करीब 26 करोड़ लोगों को प्रभावित करती हैं और हर वर्ष साढ़े चार लाख से अधिक मौतों का कारण बनती हैं।
बाल रोग विभाग के प्रो. एनएस चिदंबरम ने लंग ऑसिलोमेट्री टेस्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में इनहेल्ड दवाओं की अनुपलब्धता अथवा उनकी अधिक लागत के कारण अस्थमा से होने वाली 96 प्रतिशत मौतें इन्हीं देशों में होती हैं। उन्होंने कहा कि उच्च आय वाले देशों में भी अस्थमा के कई मरीजों की आवश्यक इनहेल्ड दवाओं तक पहुंच सीमित है, जिसके चलते ऐसी मौतें होती हैं जिन्हें आसानी से रोका जा सकता था।
कार्यक्रम के अंत में सिप्ला की टीम ने ऑफिस स्पाइरोमेट्री की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया, जिसे ओपीडी में पोर्टेबल टेस्ट के रूप में आसानी से किया जा सकता है। कार्यक्रम में डॉ. बबलू के. गौर, डॉ. विवेक त्यागी, डॉ. अरीबा सैफी, डॉ. नव्या जैन समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।

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