मां

मां से बढ़कर दुनिया में दूसरा ना कोई।
मां जननी है, मां शिक्षिका है
और मां, बच्चों की सबसे करीबी दोस्त/सखी/ सहेली है।
मां पास ना रहकर भी
हमारी स्मृतियों में सदा हमारे साथ रहती है।
उन्हीं की दुआ से आज भी हमारी जिंदगी सुरक्षित-महफूज है
यही, हर मां की विशेषता है यही मां का परोपकारी स्वरूप है
फिर चाहे वो तेरी मां हो
मां या वो मेरी माता हो।
किसने कब देखा है भगवान को?
हां, धरती पर अवतारित
मां ही देवी मां है मेरी
चाहे आंखों से ओझल हुए
एक जमाना गुजर गया है
पर मेरे अंतस्थ में मेरी मां का स्नेहिल निवास है
जी, दूर नहीं, मां आज भी मेरे पास है
मां का आशीष मेरे साथ है
मां की आत्मा की सलामती की यह मेरी दिली अरदास है।
-त्रिलोचन सिंह अरोरा

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