-पद्मश्री नामांकित डॉक्टर की संलिप्तता से हड़कंप!
-निशाने पर थे गरीब और कर्ज में डूबे लोग
-दिल्ली और तमिलनाडु तक फैली थीं जड़ें
-चंद्रपुर पुलिस जोड़ रही है रैकेट की कड़ियां
सुनील ओसवाल / मुंबई
किडनी तस्करी के एक बहुराज्यीय रैकेट की जांच ने ऐसा मोड़ ले लिया है, जहां प्रतिष्ठा और पुरस्कार की चमक भी सवालों के घेरे में आ गई है। चंद्रपुर पुलिस की विशेष जांच में पद्मश्री पुरस्कार के लिए नामांकन सूची में रहे एक नामी डॉक्टर का नाम सामने आने से चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच के मुताबिक, गरीब और कर्ज में डूबे लोगों को लालच देकर अवैध तरीके से उनके अंगों का सौदा किया गया और प्रत्यारोपण की पूरी श्रृंखला को योजनाबद्ध ढंग से संचालित किया गया।
जांच में डॉ. रविंद्रपाल सिंह का नाम उभरकर आया है। पुलिस का कहना है कि संबंधित डॉक्टर का नाम पूर्व में पद्मश्री पुरस्कार की नामांकन प्रक्रिया में शामिल रहा, जिससे इस प्रकरण की गंभीरता और बढ़ जाती है। सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क में दलाल, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंट, वित्तीय लेन-देन संभालने वाले बिचौलिए और चिकित्सा सुविधाओं का दुरुपयोग करने वाली कड़ियां शामिल हैं।
तफ्तीश से यह भी स्पष्ट हुआ है कि रैकेट की जड़ें महाराष्ट्र तक सीमित नहीं, बल्कि दिल्ली और तमिलनाडु तक फैली हैं। प्रत्यारोपण के लिए फर्जी रिश्तेदारी के कागजात, चिकित्सा रिकॉर्ड में हेरफेर और भुगतान को छिपाने के लिए लेन-देन जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस अंतरराज्यीय और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। चंद्रपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली से संबंधित आरोपी को हिरासत में लिया गया है और उसे चंद्रपुर लाने की प्रक्रिया चल रही है। तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से पेशी में देरी हुई है, लेकिन जांच की रफ्तार कम नहीं हुई। तमिलनाडु में भी अलग-अलग ठिकानों पर दबिश के लिए टीमें सक्रिय हैं। सूत्र बताते हैं कि कुछ और प्रभावशाली नाम जांच के दायरे में आ सकते हैं। यह मामला सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि नियमन और निगरानी की कमजोरियों का भी है।
संदेह के घेरे में अंग प्रत्यारोपण से जुड़े अस्पताल
अंग प्रत्यारोपण से जुड़े कानूनों के पालन, अस्पतालों की आंतरिक ऑडिट व्यवस्था और नामांकन/सम्मान प्रक्रियाओं की पारदर्शिता, इन सभी पर सवाल खड़े हुए हैं।
पुलिस का कहना है कि सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फिलहाल, जांच न्यायालयीन प्रक्रिया के अधीन है और पुलिस सावधानी बरतते हुए आगे बढ़ रही है, लेकिन इतना साफ है कि किडनी तस्करी के इस जाल में ‘बड़ी मछलियों’ तक पहुंच की दिशा में जांच निर्णायक दौर में है।
आने वाले दिनों में और खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और यही वजह है कि यह मामला देशभर की नजर में है।
