निधि के अभाव में नहीं हो
रहा जर्जर इमारतों का पुनर्निर्माण
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई मनपा ने २०१३ से म्हाडा को दिए जोन वाली उपकर के रूप प्राप्त राशि का भुगतान नहीं किया है। पिछले १३ सालों में यह राशि बढ़कर १३० करोड़ रुपए हो गई है। जिसका भुगतान अब तक मनपा ने म्हाडा को नहीं किया है, जिसके कारण उपकर प्राप्त खतरनाक इमारतों का मरम्मत और पुनर्निर्माण के काम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यानी निधि के अभाव में खतरनाक इमारतों के मरम्मत और पुननिर्माण का काम रूका हुआ है।
गौरतलब हो कि दक्षिण मुंबई में लगभग १३,००० उपकर प्राप्त इमारतें हैं। मनपा इन उपकर प्राप्त इमारतों के मालिकों और किरायेदारों से उपकर वसूलती है। इनमें से मनपा हर साल म्हाडा को १० करोड़ रुपए का भुगतान करती है। म्हाडा बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आने वाली उपकर प्राप्त इमारतों की मरम्मत का काम म्हाडा मनपा द्वारा प्राप्त उपकर राशि से करती है। लेकिन मनपा ने पिछले तेरह वर्षों से यानी २०१३ से म्हाडा को उपकर राशि का भुगतान नहीं किया है। इसलिए, बकाया राशि अब १३० करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, ऐसा म्हाडा के मुंबई भवन मरम्मत और पुनर्निर्माण बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। म्हाडा के अधिकारी के मुताबिक मनपा से उपकर राशि प्राप्त न होने के कारण कई खतरनाक इमारतों का पुनर्निर्माण रूका हुआ है। इन खतरनाक इमारतों का पुनर्निर्माण नहीं किया गया तो भविष्य में कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
