-फिर अंधेरी-पश्चिम में स्थित एक मॉल में लगी भीषण आग
-समय-समय पर ऑडिट नहीं होने की शिकायतें
द्रुप्ति झा / मुंबई
रविवार को अंधेरी-पश्चिम स्थित क्रिस्टल पॉइंट मॉल की बेसमेंट पार्विंâग में खड़ी कार में आग लग गई। इस घटना ने फिर एक बार सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के दौरान मॉल के बेसमेंट पार्किंग एरिया में एक कार में आग लगने की खबर सामने आई, जिससे दुकानदारों और आगंतुकों में दहशत फैल गई। मामले में आरोप लगाया गया कि खराब वेंटिलेशन और बेसमेंट के एग्जॉस्ट और अग्निशमन प्रणालियों में खराबी के कारण आग पर काबू पाने में समय लगा। गनीमत रही कि आग से किसी के घायल होने या हताहत होने की खबर नहीं है। आग लगने के कारण का अभी तक पता नहीं चला है। इस बारे में जांच की जा रही है।
इसी बीच, कुछ ही दिन पहले अंधेरी पश्चिम के सेवन बंगलो इलाके में भी एक रिहायशी इमारत में भीषण आग लग गई। खबरों के मुताबिक, यह आग वर्सोवा मेट्रो स्टेशन के पास नालंदा बिल्डिंग में लगी थी। इससे पहले, जुहू के पॉश इलाके में एक ११ मंजिला रिहायशी इमारत के एयर कंडीशनिंग यूनिट में आग लग गई थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह आग आरोग्य निधि अस्पताल के पास स्थित मनीषा बिल्डिंग में लगी थी। आग इमारत की छठी मंजिल पर लगे एसी यूनिट तक ही सीमित रही।
एनओसी के बाद भूल जाते हैं नियम
अधिकांश इमारतों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर एनओसी मिलने के बाद सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा नहीं होती। खराब स्प्रिंकलर, एक्सपायर अग्निशमन यंत्र और बंद आपातकालीन निकास किसी भी छोटी चिंगारी को बड़े हादसे में बदल सकते हैं। विशेषज्ञ नियमित फायर ऑडिट और मॉक ड्रिल को अनिवार्य बनाने की मांग कर रहे हैं।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण आग लगने की घटनाओं में हो रही वृद्धि
सुरक्षा नियमों की अनदेखी और फायर सेफ्टी सिस्टम की समय पर जांच न होना आज एक बेहद गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। हाल के दिनों में मॉल्स, सोसायटियों और फैक्ट्रियों में आग लगने की बढ़ती घटनाएं इसी लापरवाही का नतीजा हैं। कई सोसायटियों और फैक्ट्रियों में सालों-साल फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं कराया जाता। एनओसी मिलने के बाद नियमों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। आग बुझाने वाले सिलेंडर एक्सपायर हो जाते हैं, पाइपलाइन में पानी का प्रेशर नहीं होता और स्प्रिंकलर सिस्टम जाम पड़े रहते हैं। कई जगहों पर आपातकालीन निकास या तो बंद मिलते हैं या वहां कबाड़ और सामान भर दिया जाता है, जिससे भागने का रास्ता बंद हो जाता है।
