पीओपी और जहरीले रसायनों के पूरे तालाब में घुलने का खतरा
पर्यावरण संरक्षण पर मनपा की लापरवाही फिर कटघरे में
पिछले साल मरी थीं हजारों मछलियां?
सुरेश गोलानी / मुंबई
गणेशोत्सव बीतते ही नियमों को ताक पर रखकर प्राकृतिक संसाधनों के साथ किया गया खिलवाड़ साफ नजर आने लगा है। मीरा-भायंदर महानगरपालिका ने प्राकृतिक तालाबों के बीचों-बीच कंक्रीट की पक्की दीवार खड़ी कर जिस ‘कृत्रिम विसर्जन क्षेत्र’ का आविष्कार किया था, उसकी पोल खुल चुकी है। ताजा तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि भायंदर पश्चिम स्थित मांडली तालाब की यह दीवार पूरी तरह पानी के नीचे जलमग्न हो चुकी है, जिससे दोनों तरफ का पानी आपस में मिल गया है। मनपा का तर्क था कि दीवार के एक तरफ प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का विसर्जन करने से मुख्य तालाब में प्रदूषण नहीं फैलेगा, लेकिन दीवार के डूबने के कारण रासायनिक रंग, पीओपी और जहरीले तत्व पूरे प्राकृतिक तालाब में स्वतंत्र रूप से घुल चुके हैं, जिससे जलीय जीवों के जीवन पर सीधा खतरा मंडराने लगा है।
पिछले वर्ष भी यहां बड़े पैमाने पर मछलियां मरी थीं। मनपा ने नया कृत्रिम तालाब बनाने के खर्च से बचने के लिए प्राकृतिक तालाब के टुकड़े कर मुंबई उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। इस घोर लापरवाही के खिलाफ स्थानीय नागरिक व पत्रकार धीरज परब ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) तथा अन्य संबंधित विभागों को आधिकारिक शिकायत भेजी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा और संबंधित अधिकारियों ने बिना किसी पर्यावरणीय अनुमति के ११ प्राकृतिक तालाबों का अवैध निर्माण कर विभाजन किया है।
