मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : ईरान के साहिलों पर तेल की झील!

मुस्लिम वर्ल्ड : ईरान के साहिलों पर तेल की झील!

सूफी खान

सोशल मीडिया पर तैर रहे कुछ वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ईरान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास समुद्र में इतना तेल दिख रहा है कि जैसे तेल की झील फूट पड़ी हो। ऐसा नहीं है कि ईरान का समुद्र तेल छोड़ने लगा है, दरअसल ये उन जहाजों और तेल टैंकरों से निकला ऑइल है जिन्हें ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उड़ा दिया या डुबो दिया। ये ईरान के दुश्मनों के उन जहाजों का तेल है, जिन्हें उसकी परमिशन के बिना आबनाए होर्मुज से गुजारा जा रहा था।
ईरान में आईआरजीसी नेवी ने पहले भी वीडियो दिखाते हुए कई दावे किए हैं, कई वीडियो में दिखाया गया कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान को इग्नोर करके कोई भी जहाज निकालने की कोशिश की गई तो अंजाम क्या होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात बेहद नाजुक होते जा रहे हैं। अभी १२ दिन पहले ईरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिकी हवाई सुरक्षा में यहां से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों पर हमला कर उन्हें रोक दिया। वीडियो में टैंकर धधकते हुए दिखाए गए हैं। ईरान ने ये भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब भी बंद है और यहां से गुजरने वाले सभी तेल टैंकरों को ईरान से खास इजाजत लेनी होगी। ईरान में आईआरजीसी ने साफ कह दिया है कि अमेरिकी सैन्य कमांड सेंटकाम ये दावा करती है कि होर्मुज से गुजरने वाले टैंकर अमेरिकी सुरक्षा में गुजर रहे हैं तो ये झूठा दावा है।
ईरान ने ेअमेरिका के साथ हुए युद्धविराम के टूटने के बाद से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फिर से नाकेबंदी लागू कर दी थी। तेहरान का कहना है कि उसे इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलने का अधिकार है और जहाजों की आवाजाही को केवल अपने तटीय जलक्षेत्र तक सीमित करने का अधिकार भी है।
अब ईरानी आयलैंड के समुद्र तट तेल से ढंके होने के वीडियो बता रहे हैं कि ईरान अपनी समुद्री नाकेबंदी को लेकर और सख्त हो गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ी संख्या में टैंकरों के फटने के बाद भारी मात्रा में तेल समुद्र में पैâल गया है। दो दिन पहले तो ये खबर भी आई थी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब नहीं खुलेगा, साल २०२९ तक तो नहीं खुलेगा। ईरान अमेरिका के आगे किसी भी कीमत में नहीं झुकेगा। साल २०२९ यानी प्रेसिडेंट ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने के बाद ही ईरान नए अमेरिकी प्रशासन से बात करेगा। अगर ईरान इस रणनीति पर काम कर रहा है तो ये खित्ते में एक नए बवाल का सबब बन सकती है।

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