मुख्यपृष्ठविश्वमुस्लिम वर्ल्ड : अरब पार्टियों ने कर दिया खेल!

मुस्लिम वर्ल्ड : अरब पार्टियों ने कर दिया खेल!

-सूफी खान

-पीएम नेतन्याहू की बढ़ी बेचैनी
इजरायल की सियासत ऐसे-ऐसे मोड़ ले रही है कि कल तक हिकारत से देखे जाने वाले अरब मुसलमान ही किसी न किसी रूप में वहां की सत्ता बनाने की ताकत रखते हैं। दरअसल, अरब विपक्षी गठबंधन के चेहरे गादी आइजनकोट कह चुके हैं कि वे नेतन्याहू को सत्ता में आने से रोकने के लिए कुछ शर्तों के साथ अरब पार्टियों का समर्थन लेने को भी तैयार हैं। अब पीएम नेतन्याहू की बेचैनी बढ़ गई है।
यही वजह है कि पीएम नेतन्याहू ने अपने सबसे बड़े विरोधी गादी आइजनकोट के साथ सरकार बनाने का विकल्प भी खुला रखा है। नेतन्याहू अपने ही खिलाफ लड़ रहे विपक्ष को इशारे दे रहे हैं कि चलो, मिलकर सरकार बना लेते हैं। जबकि गादी आइजनकोट इस कोशिश में हैं कि अरब पार्टियों और अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स यहूदी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बना ली जाए और किसी भी तरह नेतन्याहू को इजरायल का प्रधानमंत्री बनने से रोका जाए। गादी आइजनकोट का गुट और इजरायल की अरब पार्टियां मिलकर ६७ सीटें हासिल कर सकते हैं, जो ६१ सीटों के बहुमत से कहीं ज्यादा हैं। खास बात यह भी है कि इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के गुट ने याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजनकोट को समर्थन दे दिया है। एक पूर्व प्रधानमंत्री की पार्टी सीधे तौर पर आइजनकोट के साथ आ गई है। लेकिन गादी आइजनकोट ने यहां कुछ शर्तें रख दी हैं। वे ये हैं कि अगर वे अरब पार्टियों का समर्थन लेंगे तो अरब पार्टियों को यह मानना पड़ेगा कि गाजा का संगठन हमास एक आतंकवादी संगठन है। इतना ही नहीं, आइजनकोट की सरकार को समर्थन देने वाली सभी पार्टियों को इजरायल को एक यहूदी और लोकतांत्रिक देश के तौर पर स्वीकार करना होगा। दरअसल, अरब दल अब भी दो-राष्ट्र समाधान के समर्थक हैं और फिलिस्तीन की आजादी की मांग करते हैं। ऐसे में आइजनकोट के साथ आने के लिए अरब पार्टियों को अपना रुख स्पष्ट करना होगा। अगर नेतन्याहू को रोकना है तो हो सकता है कि कुछ मुद्दों पर दोनों गुटों के बीच समझौता हो भी जाए।
वहीं, अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स यहूदियों के लिए भी आइजनकोट की शर्त है कि इजरायल के सभी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य की जाएगी। नेतन्याहू के दौर में अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स यहूदियों को इससे छूट मिली हुई थी। अब देखना होगा कि अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स की पार्टियां इन शर्तों को मानती हैं या नहीं? लेकिन इजरायल में जनता सड़कों पर है और मांग कर रही है कि यहूदी विपक्ष को अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनानी चाहिए, जिससे पीएम नेतन्याहू सत्ता में वापस नहीं आ पाएं। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने अरब पार्टियों पर विदेशी सरकारों के समर्थन से चुनाव चुराने का आरोप लगाया है।
तेल अवीव के हबीमा स्क्वायर पर हुए प्रदर्शन में लोगों ने यहूदी और अरब पार्टियों के बीच साझेदारी की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यहूदी और अरब दुश्मन बनने से इनकार करते हैं और ‘नस्लवाद नहीं, साझेदारी चाहिए’ जैसे नारे लगाए। अब देखना होगा कि १० नवंबर तक यह सारी सियासी जोड़-तोड़ इजरायल में पूरी हो पाती है या नहीं, क्योंकि अगर १० नवंबर तक ऐसा नहीं हो पाया तो इजरायल में फिर से चुनाव कराने की नौबत आ जाएगी।

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