सूफी खान
-ईरान-अमेरिका डील से पाकिस्तान गेट आउट!
अमेरिका के पिछलग्गू बने पाकिस्तान की नियत को ईरान भांप गया है। यही वजह है कि ईरान ने पाकिस्तान को एक बड़ा झटका दिया है। अब ईरान-अमेरिका की बातचीत का दूसरा दौर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की जगह कतर में होगा और इसके लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल कतर की राजधानी दोहा पहुंच चुका है।
ईरान-अमेरिका की वार्ता में पहले मध्यस्थता का जिम्मा पाकिस्तान और तुर्की ने उठा रखा था। पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच पहले दौर की वार्ता भी इस्लामाबाद में करवाई थी, लेकिन इसमें कोई हल नहीं निकल सका। इसके बाद दूसरे दौर की बातचीत के लिए भी कोशिशें भरपूर हुईं, लेकिन दोनों देश आमने-सामने बैठ तक नहीं सके। ईरान का आरोप था कि पाकिस्तान, अमेरिका की ओर से फील्डिंग कर रहा है। वहीं अमेरिका को भी पाकिस्तान पर संदेह था। यही वजह है कि अब इस मामले में कतर की एंट्री हुई है, जो समझौते की शर्तों पर ईरान और अमेरिका को राजी करने में जुटा है।
फिलहाल दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर किसी समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोहा में चल रही बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि कतर मिडिल ईस्ट में एक भरोसेमंद मीडिएटर माना जाता है। कतर ने इजरायल-हमास पीस टॉक और पहले अमेरिका-तालिबान शांति वार्ता भी सफलता से अंजाम दी है। ऐसे में ईरान ने भी कतर पर भरोसा करना बेहतर समझा बजाए इस्लामाबाद के। एक उच्च-स्तरीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार से जुड़ी चर्चाओं को अंतिम रूप देने के लिए कतर की राजधानी दोहा में मौजूद है। बातचीत कतर ट्रांसफर होने की एक वजह और है, वो है ईरान का पुराना पैसा। जी हां, ईरान की सरकारी फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, वॉशिंगटन तेहरान की प्रâीज हुई विदेशी संपत्तियों का कुछ हिस्सा जारी करने पर सहमत हो गया है, जो अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के अधीन है। ईरान की ये प्रâीज रकम कतर के पास है। कतर में ईरान की जमी हुई संपत्ति की सही मात्रा स्पष्ट नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स ने पहले बताया है कि यह आंकड़ा ६ बिलियन डॉलर था। ईरान द्वारा हिरासत में लिए गए पांच अमेरिकी नागरिकों की रिहाई के बदले २०२३ में दक्षिण कोरिया से कतर को हस्तांतरित धनराशि बताई जाती है। इससे पहले पाकिस्तान को यह बैठक इस्लामाबाद में होने की उम्मीद थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में पीस टॉक-२ की बात भी कही थी। ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर सैद्धांतिक सहमति बनती दिख रही है, जिसके बाद दोनों देश फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने में जुट गए हैं। दोनों की कोशिश जल्द से जल्द ड्राफ्ट तैयार करने की है, जिस पर हस्ताक्षर के जरिए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके। खबर है कि ट्रंप ने इस समझौते से इजरायल को दूर रखा है और पीएम नेतन्याहू की बात नहीं सुनी है। इस समझौते को अमल में आता देख नेतन्याहू बेहद परेशान हैं।
