सूफी खान
आटा, पानी, दूध, दवाइयां, बच्चों के डायपर और सेनेटरी पैड लेकर पानी का एक जहाज तेजी से गाजा की ओर बढ़ रहा था। दो हजार किलोमीटर का समुद्री रास्ता तय कर लहरों के थपेड़े और समुद्री तूफान सब कुछ झेलते हुए ये जहाज भूख से बिलखते गाजा के बच्चों को राहत देने पहुंचा था कि इजरायल की नेवी ने इसे गाजा की समुद्री नाकाबंदी तोड़ने से पहले ही हिरासत में ले लिया। जहाज का नाम द मेडलिन है, जो गाजा की बेहद मशहूर फिशर वूमेन के नाम पर है। अरबी में इन्हें मेदलिन कहा जाता था। इस जहाज में मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के साथ कुल ११ लोग शामिल थे। जिनमें प्रâांस की सांसद रीमा हसन, जर्मनी की यासमीन जार, प्रâांस के बैप्टिस्ट आंद्रे, ब्राजील के थियागो अविला, प्रâांस के उमर फईद, पैस्कल और यानीस महादी, तुर्किए के सूयाब ओर्दू, स्पेन के सर्गियो टॉर्बियो, नीदरलैंड्स के मार्को वैन रेन्स और प्रâांस की रेवा वियार्ड के नाम हैं। इन सभी को इजरायल ने अपनी हिरासत में ले लिया।
ये लोग मानवाधिकार संगठन एफएफसी से जुड़े हैं। यह जहाज एक जून को इटली के सिसली के बंदरगाह से रवाना हुआ था। कहा जा रहा है कि द मेडिलिन जहाज सिर्फ गाजा में परेशान हाल लोगों के लिए मदद लेकर ही नहीं जा रहा था बल्कि उसका मकसद इजरायल की गाजा पर समुद्री नाकाबंदी तोड़ना था, जो साल २००७ से जारी है। जिसके चलते कोई भी जहाज बिना इजरायल की परमिशन के गाजा में दाखिल नहीं हो सकता। जहाज में दल की कयादत या नेतृत्व कर रही लड़की ग्रेटा थनबर्ग ने अपने सफर पर निकलते वक्त कहा था कि हम ऐसा कर रहे हैं क्योंकि हमें गलत के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। हमें कोशिश करनी चाहिए क्योंकि जिस पल हम कोशिश करना छोड़ देंगे, उस पल हम हमारी मानवता को छोड़ देंगे। सारी दुनिया के मुसलमान जब ईद उल अजहा की खुशियों में मशगूल थे। तब भी गाजा के बच्चे भूख से बिलख रहे थे। उनका कोई पुरसान ए हाल नहीं था। पिछले दिनों खाना लेने जाने पर उन पर गोलियां चलीं ३१ लोग मारे गए। लेकिन अमीर और तेल की दौलत से मालामाल अरब मुल्क चुपचाप तमाशा देखते रहे। किसी की हिम्मत न हुई की इजरायल के खिलाफ कुछ कह दें।
