सूफी खान
-यूएई, बहरीन क्यों ले रहे एक्शन?
ईरान, अमेरिका-इजरायल जंग और उसके बाद से मिडिल ईस्ट में लगातार बना तनाव अब वहां के कई देशों पर सीधा असर डाल रहा है। दरअसल, वेस्ट एशिया में जनता भी दो खेमों में बंट गई है। एक तो वो लोग हैं जो अमेरिका के साथ हैं और दूसरे वो जो अमेरिका और इजरायल को मिडिल ईस्ट से दूर रखने की बात करते है। ऐसे में अमेरिका समर्थित देशों ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है।
ईरान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे शिया मुसलमानों पर दिखाई देने लगा है। खासकर यूएई और बहरीन में हाल के दिनों में शिया समुदाय के खिलाफ उठाए गए कड़े कदमों ने नई बहस छेड़ दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब सवाल उठने लगा है कि अगर यूएई, बहरीन में शियाओं पर कार्रवाई और तेज होती है तो क्या ईरान खुलकर प्रतिक्रिया देगा?
दरअसल, ईरान ने ४० दिनों की जंग के दौरान बहरीन और यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए थे। यूएई तो अब्राहम समझौते के तहत इजरायल को मान्यता भी देता है। इसके बाद दोनों देशों की सरकारों ने सुरक्षा और आंतरिक खतरे का हवाला देते हुए शिया समुदाय से जुड़े लोगों पर सख्ती बढ़ानी शुरू कर दी।
यूएई में तो हजारों पाकिस्तानियों को देश छोड़ने पर मजबूर किए जाने का दावा किया गया। पाकिस्तान की संसद में भी इस पर चर्चा हुई थी। यूएई में आरोप लगाया गया कि वहां रह रहे पाकिस्तानी शिया ईरान समर्थक गतिविधियों और फंडिंग से जुड़े थे। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि निर्वासित लोगों के मोबाइल और पैसे तक जब्त कर लिए गए। हालांकि, पाकिस्तान की सरकार ने वापस भेजे गए लोगों पर आपराधिक मामले होना बताया। जबकि यूएई अपने दावे पर कायम रहा।
उधर बहरीन में शिया मुसलमानों के इकोनॉमिक ढांचे पर कार्रवाई की खबरें हैं। बहरीन में हुकूमत ने शिया समुदाय के दान और धार्मिक फंड को कंट्रोल करने के लिए नया कानून लाने का पैâसला किया है। आरोप लग रहा है कि बहरीन वहां के शिया फंडिंग सिस्टम को सरकार के इस्लामिक प्रशासनिक ढांचे के अधीन लाने की तैयारी में है। जबकि अब तक शिया समुदाय को अलग से बहरीन में अपना इकोनॉमिक सिस्टम चलाने की छूट थी। नए नियमों के बाद उन पर सरकारी निगरानी बढ़ सकती है। बहरीन और यूएई की सरकारें मानकर चल रही हैं कि उनके यहां के शिया ईरान समर्थक हैं। बहरीन में तो शिया पॉपुलेशन बहुत बड़ी तादाद में है।
फिलहाल, जंग के बाद पैदा हुआ यह नया तनाव खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों शिया मुसलमानों की सुरक्षा, पहचान और भविष्य का सवाल बनता जा रहा है।
