सूफी खान
अक्सर एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरानी कालीन जितने खूबसूरत और कीमती होते हैं, उतने ही धैर्य, धीरज और महीन बुने जाते हैं। इसमें बहुत समय लगता है। लेकिन जो प्रोडक्ट बनकर निकलता है वो लाजवाब होता है। ईरान में एक कहावत भी है कि ईरानी लोग बहुत महीन बुनते हैं, जिसके मायने हैं कि ये कौम बहुत सब्र करने वाली कौम है, लेकिन तकनीक से लेकर हर चीज भी बहुत आगे है। यही वजह है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर मिलकर अटैक किया था, लेकिन ४० दिन लड़ने के बावजूद उनके हाथ कुछ नहीं लगा और ईरान जंग के बाद और बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
अब तो अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। एक बड़े अमेरिकी अखबार द्वारा सार्वजनिक की गई रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका ईरान के प्रमुख बंदरगाहों की पूर्ण समुद्री नाकेबंदी करता है, तो भी ईरानी अर्थव्यवस्था कम से कम चार महीने यानी १२० दिनों तक बिना किसी बड़े दबाव के स्थिर रह सकती है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ चला रहे हैं।
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात ये कही गई है कि ईरान पर तुरंत आर्थिक दबाव न बन पाने के कारण कूटनीतिक मेज पर अमेरिका की पकड़ कमजोर हो रही है। ट्रंप प्रशासन को उम्मीद थी कि नाकेबंदी के कुछ ही हफ्तों के भीतर ईरान बातचीत के लिए मजबूर हो जाएगा। लेकिन ईरान ने तो लगभग ४५ साल की तैयारियों से खुद को इस तरह के आर्थिक झटके सहने के काबिल बना लिया है। वहां जनता को बुरे से बुरे आर्थिक हालात में रहने की आदत है। इसी दौरान उन्होंने अपनी जरूरत का सामान खुद बनाना सीख लिया। जिससे उन्हें दुनिया पर कम से कम निर्भर होना पड़ता है।
अब हालात ये हैं कि जहां अमेरिकी खुफिया अधिकारी ईरान के लचीलेपन की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं प्रशासन के कुछ अन्य वर्गों का मानना है कि नाकेबंदी का असर हो रहा है और ईरान को प्रतिदिन ५० करोड़ डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि ईरान ने जंग से पहले जितना तेल नहीं बेचा था उससे कई गुना ज्यादा जंग के दौरान और जंग के बाद बेचा। आज दुनिया के अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका कंट्रोल है जो युद्ध से पहले नहीं हुआ करता था।
मीडिया रिपोर्ट दावा करती हैं कि हफ्तों तक चले हमलों के बाद भी ईरान का ७०ज्ञ् मिसाइल भंडार और ७५ज्ञ् मोबाइल लॉन्चर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं। ईरान ने अपनी कई महत्वपूर्ण सैन्य संपत्तियों को पहाड़ों के नीचे बनी अभेद्य सुरंगों में छिपा रखा है।
ईरान ने पड़ोसी देशों के साथ जमीनी रास्तों खासकर लंबे रेल रूट के जरिए वैकल्पिक कारोबार की व्यवस्था पहले से कर रखी है चीन से लेकर रूस तक उसका व्यापार चल रहा है।
