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मुस्लिम वर्ल्ड : बंधकों की लाश पर आतंकी संगठन ने खड़े हाथ किए! …क्या बोला हमास? गुस्से में नेतन्याहू

सूफी खान

इजराइल और हमास के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद भी तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। समझौते के तहत गाजा से सभी इजराइली बंधकों के शव लौटाए जाने थे, लेकिन अभी तक २८ में से केवल ४ शव ही वापस आए हैं। इजराइली सरकार का कहना है कि हमास कुछ शवों को जानबूझकर रोक रहा है, जबकि मध्यस्थ देशों का कहना है कि गाजा की तबाही के बीच मलबे में शवों की तलाश बेहद मुश्किल है। बताया जा रहा है कि हमास को इजरायल ने डेडलाइन दी है, अगर उसने बाकी शव नहीं लौटाए तो इजरायल इसे समझौते का उल्लंघन मानते हुए गंभीर कदम उठा सकता है।
ये पूरा समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के २०-पॉइंट पीस प्लान का हिस्सा है, इसी प्लान के तहत सोमवार को हमास ने २० जीवित बंधक रिहा किए थे, जबकि बदले में इजराइल ने १९६६ फिलिस्तीनी वैâदियों को आजाद किया। हालांकि, इस अदला-बदली के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने चेतावनी दी है कि अगर हमास ने शव नहीं लौटाए तो ‘शांति की जगह फिर से जंग’ लौट सकती है। यह बयान उस वक्त आया है जब हमास और इजराइल दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में दबाव में है। एक तरफ बंधक परिवारों का गुस्सा है तो दूसरी ओर गाजा में जारी मानवीय संकट।
इंटरनेशनल कमिटी ऑफ रेड क्रॉस यानी आईसीआरसी जो इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रही है, उनका कहना है कि गाजा की तबाही के बाद शवों की खोज बेहद चुनौतीपूर्ण है। कई जगहों पर मलबा इतना गहरा है कि टीमों को बॉडी बैग, ठंडी गाड़ियां और भारी उपकरणों के साथ कई दिनों तक खुदाई करनी पड़ रही है। रेड क्रॉस का कहना है कि हर शव को गरिमा और सम्मान के साथ वापस करना इस समझौते का सबसे अहम हिस्सा है, क्योंकि बंधकों की मौत के बाद भी परिवार उनके आखिरी संस्कार का हक चाहते हैं।
सोमवार को जो चार शव सौंपे गए, उन्हें पहचान के लिए तेल अवीव के अबु कबीर फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट भेजा गया। मंगलवार को इनमें से दो शवों की पहचान गाय इलूज और बिपिन जोशी के रूप में हुई। २६ साल का गाय इलूज म्यूजिक इंडस्ट्री में नाम बना रहा था, जो ७ अक्टूबर २०२३ को नोवा म्यूजिक फेस्टिवल में हमले का शिकार हुआ। गोली लगने के बाद उसे गाजा ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, २३ वर्षीय बिपिन जोशी नेपाल से एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने इजराइल आया था। अलुमिम किबुत्ज से उसका अपहरण कर लिया गया था।
इजराइली सेना ने बताया कि हमास ने इससे पहले भी कुछ ऐसे शव लौटाए थे, जो इजराइली बंधकों के नहीं थे। इससे यह प्रक्रिया और जटिल हो गई है। इजराइल अब इस बात की जांच कर रहा है कि गाजा में बाकी शव कहां और किस हालत में हैं। दूसरी तरफ बंधक परिवारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। तेल अवीव में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके परिजन जिंदा हों या नहीं, वे उन्हें हर हाल में वापस चाहते हैं। गाजा से लौटते शव अब शांति की उम्मीद नहीं, बल्कि एक और बेचैनी और अविश्वास का संकेत बन चुके हैं।

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