बस बहुत हुआ’… गाजा में इजरायली आक्रामकता के खिलाफ ये आवाजें अब दुनियाभर से आ रही हैं। इजरायल के लगातार हवाई और जमीनी हमलों से तबाह गाजा वालों के लिए अब वैश्विक स्तर पर समर्थन की एक नई लहर उठ खड़ी हुई है। इसी की बानगी है ‘ग्लोबल मार्च टू गाजा’ नाम का एक अहिंसक और साहसिक अभियान।
आरिश से राफा तक पैदल मार्च और फिर प्रदर्शन। ८ मार्च को शुरू हुए इस अंतर्राष्ट्रीय राहत और विरोध अभियान के तहत अब मिस्र के आरिश शहर में इकट्ठा हुए प्रतिभागी पैदल गाजा-मिस्र की राफा क्रॉसिंग की ओर बढ़ रहे हैं। राफा बॉर्डर पर १५ जून से स्थायी प्रदर्शन शिविर लगाने की योजना है। जहां वैश्विक प्रतिनिधि फिलिस्तीनियों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाएंगे। इस लॉन्ग मार्च की कमान संभाली है अल्जीरिया के मानवाधिकार समूह अलग्रेन इनीशिएटिव के लीडर शेख याह्या सारी ने, जो पैरों में चप्पल पहन खाली हाथ एक बहुत बड़े मजमें की कयादत कर रहे हैं। यह ग्लोबल मार्च ट्यूनीशियाई काफिले के साथ लीबिया और मिस्र होते हुए गाजा पहुंचने जा रहा है। सैकड़ों लोगों का ये काफिला केवल राहत सामग्री ही नहीं ला रहा, बल्कि एक नैतिक चेतावनी और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन की प्रतीक बन चुका है।
गौरतलब है कि इजरायल गाजा के इन हमलों को आत्मरक्षा बताता है, जबकि मानवाधिकार संगठन इसे युद्ध अपराध कह रहे हैं। ग्लोबल मार्च टू गाजा संगठन ने बताया कि इसमें हिस्सा लेने वाले ३२ देशों से हैं। प्रâांस, ब्राजील, आयरलैंड, दक्षिण अप्रâीका, कनाडा, तुर्की, जर्मनी, मलेशिया जैसे मुल्कों से लोग इसमें सहभागिता देने पहुंचे हैं। यहीं नहीं इसके साथ ही अरब और अप्रâीका के मुस्लिम देशों जैसे मिस्र, मोरक्को, लेबनान, कतर साथ ही कई एशियाई प्रतिनिधि भी इस अभियान में शामिल हैं। इनमें डॉक्टर, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, छात्र और समाजसेवी भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं कहा जा रहा कि कुल दो से ढाई हजार लोग इस ग्लोबल मार्च में चल रहे हैं। पूरी तरह से इजरायली नाकाबंदी का शिकार गाजा की राफा सीमा पर प्रस्तावित शिविर सिर्फ एक प्रदर्शन स्थल नहीं, बल्कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय दबाव बिंदु बनेगा, जहां लाइव भाषण होंगे। घेराबंदी के खिलाफ प्रदर्शन, गाजा में मानवीय सहायता की मांग और इजरायल की जवाबदेही तय करने की मांग अहिंसक तरीके से की जाएगी।
ये प्रदर्शन नहीं, उम्मीद की लौ है
मिडिल ईस्ट मामलों पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट कहते हैं कि ‘ग्लोबल मार्च टू गाजा’ कोई आम प्रदर्शन नहीं हैं। यह अभियान गाजा के लोगों के लिए उम्मीद की लौ और इजरायली आक्रामकता के खिलाफ एक संगठित वैश्विक प्रतिकार है। आज जब गाजा के बच्चे भूख से बिलख रहे हैं, तब ये लोग इजरायल, अमेरिका और अमीर अरब देशों को बता रहे हैं कि `हम देख रहे हैं, हम साथ हैं, और हम चुप नहीं रहेंगे।’
