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मुस्लिम वर्ल्ड : सूडान हिंसा में पर्दे के पीछे किस देश का क्या खेल?

सूफी खान

सोने की दौलत से मालामाल लेकिन गरीब अप्रâीकी देश सूडान इस समय सबसे खराब मानवीय आपदाओं से दो-चार हो रहा है। सूडान के दारफुर में इस कदर अत्याचार और हत्याएं हुई हैं कि इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि, सूडान में सिविल वॉर पहली बार अप्रैल २०२३ में छिड़ा था। जब स्थानीय मिलिशिया, रैपिड सपोर्ट फोर्सेज या आरएसएफ जो वहां का अर्धसैनिक बल भी कहा जाता है, उसके और सूडानी सशस्त्र बल या एसएएफ के बीच नियमित सेना में शामिल करने को लेकर मतभेद हो गया।
जानते हैं कि इसके पीछे कौन-कौन सी ताकतें हैं और उनके सूडान में क्या-क्या इंटरेस्ट हैं। जनरल अब्देल-फतह बुरहान, जो एसएएफ के प्रमुख भी हैं, उनके नेतृत्व में सूडान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को मिस्र, तुर्की, रूस और ईरान का समर्थन प्राप्त है। जबकि आरोप लग रहा है कि आरएसएफ को यूएई का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात इससे इनकार करता है। मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि युद्ध के दौरान रैपिड सपोर्ट फोर्स आरएसएफ के पास हथियारों और र्इंधन के लिए कई आपूर्तिकर्ता थे, लेकिन मेन सप्लायर यूएई बना हुआ है। लेकिन यूएई ने बार-बार आरएसएफ का समर्थन करने से इनकार किया है। ऐसे आरोपों को वो सूडान की सेना का मीडिया अभियान बता रहा है और माफी की मांग की है। लेकिन स्वतंत्र विश्लेषक नियमित रूप से यह निष्कर्ष निकालते रहे हैं कि आरएसएफ द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियार और गोला-बारूद अमीराती मूल के थे।
अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी और विदेश विभाग के खुफिया ब्यूरो के सूत्रों ने इस सप्ताह अमेरिकी मीडिया को बताया कि सूडान में उन्नत चीन निर्मित ड्रोन के साथ-साथ छोटे हथियार, भारी मशीन गन, वाहन, तोपखाने, मोर्टार और गोला-बारूद खूब इस्तेमाल हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि यूएई ने ना सिर्फ लीबिया की सीमा से सीधे सूडान तक, बल्कि चाड और युगांडा के रास्ते भी हथियारों की तस्करी की है। बदले में यूएई, पारंपरिक रूप से सूडानी सोने के सबसे बड़े आयातक के रूप में, सूडान के सोने तक अपनी पहुंच बनाए रखने में निहित स्वार्थ रखता है।
इतना ही नहीं, मिस्र एसएएफ सूडान की फौज का प्रमुख समर्थक रहा है। कहा जा रहा है कि मिस्र ने भी एसएएफ पायलटों को प्रशिक्षित किया है और ड्रोन प्रदान किए हैं, जिससे मिस्र भी इनकार करता है। एसएएफ का एक दूसरा समर्थक ईरान है, जिसने ड्रोन भी उपलब्ध कराए हैं। जानकार बताते हैं कि सूडान में ईरान का इंटरेस्ट पड़ोसी यमन को सेफ करना है। यमन में अंसारुल्लाह ईरान हिमायती माने जाते हैं। लाल सागर पर एक नौसैनिक अड्डा चाहता है, जो सूडान के करीब हो। यमन में हूती की हिमायत और हथियार देने में सूडान ही काम आता है।
बात तुर्की की करें तो तुर्की ने एसएएफ यानी सूडान की सेना को ड्रोन और मिसाइल भी मुहैया कराई हैं। तुर्की की रुचि लाल सागर तक अपनी पहुंच सुरक्षित करने में है। रूस का भी सूडान में दखल है। हालांकि, वो तुलनात्मक रूप से छोटी भूमिका निभाता है। तो सभी देशों के सूडान को लेकर अपने-अपने हित जुड़े हुए हैं। हालांकि, कोई भी सूडान में किसी भी पक्ष को सपोर्ट करने की अपनी भूमिका से इनकार जरूर करता है, लेकिन सूडान के बिगड़ते हालात बता रहे हैं कि बिना बड़ी ताकतों के इंटरेस्ट के वहां इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती। यही गाजा में हुआ और अब सूडान इसका शिकार हो रहा है।

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