सूफी खान
ईरान और अमेरिका के बीच कभी भी जंग छिड़ सकती है इसलिए ईरान अपनी तैयारियों को तेजी से अंजाम दे रहा है। कहा जा रहा है कि अमेरिका के लिए भी ये मौका अभी नहीं तो कभी नहीं वाला है। अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके हमलावर दल मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच स्थित मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंच चुके हैं। ईरान की घेराबंदी के लिए ही अमेरिका से इसे भेजा गया है।
ईरान मिडिल ईस्ट का सबसे अहम देश है। यहां दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा तेल और नेचुरल गैस का भंडार है। इसके अलावा ईरान का होर्मुज स्ट्रेट जो तेल और दीगर कारोबारी नजरिए से बेहद अहम माना जाता है। दुनिया के २० परसेंट तेल का कारोबार इसी हिस्से से होता है।
अब पश्चिमी मीडिया की कुछ रिपोर्ट दावा कर रही हैं कि अमेरिका के डिफेंस हेडक्वार्टर पेंटागन ने ईरान में सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के इस्लामिक रिवोल्यूशन का तख्ता पलटने का पूरा प्लान तैयार किया है। कहा जा रहा है कि १४ जनवरी को एक हाईलेवल मीटिंग में राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इस तरह के प्लान को बनाने का आदेश दिया था। ये ईरान में तख्तापलट का फाइनल प्लान माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट कहती हैं कि अमेरिकी अखबार का दावा है कि ईरान को लेकर जो प्लान तैयार किया गया है, उसमें ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स या आईआरजीसी के ठिकानों को तबाह करना भी शामिल है। दरअसल, ईरान में आईआरजीसी ही इस्लामिक रेवोल्यूशन की रिजीम की हिफाजत करता है। ऐसे में अमेरिका और इजरायल की पहले भी कोशिश रही है कि इस फोर्स के बड़े दोनों को खत्म कर दिया जाए। जनरल कासिम सुलेमानी की इराक में हत्या या फिर १३ जून, २०२५ की सुबह तेहरान में हमला कर आईआरजीसी के टॉप कमांडरों का खत्मा, ये सब उसी रणनीति का हिस्सा है।
आरोप लगता रहा है कि इसके अलावा मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में आईआरजीसी के जरिए तैयार की गई ईरान की प्रॉक्सी भी हैं। इनमें हिजबुल्लाह, हश्दुश्शाबी, हूती, कताइब हिजबुल्लाह समेत ४० से ज्यादा संगठन हैं। कहा जाता है कि ईरान पर संकट की स्थिति में वो भी अमेरिका और उसके हिमायतियों पर हमले करेंगे।
जानकार कहते हैं कि ईरान में तख्तापलट पेंटागन के लिए तब भी आसान नहीं होगा क्योंकि ईरान की शासन व्यवस्था काफी जटिल है। एक तरफ सुप्रीम लीडर खामेनेई के पास सेना और न्यायपालिका से जुड़े सभी अधिकार हैं। वहीं दूसरी तरफ वहां पर राष्ट्रपति लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आते हैं, जो देश की आर्थिक नीति तैयार करते हैं। ईरान में मजहबी सुप्रीमेसी है साथ में लोकतंत्र भी है। ईरान में वैâबिनेट और संसद की भी व्यवस्था है। य्ाानी वहां पर सिर्फ खामेनेई को खत्म कर तख्तापलट नहीं किया जा सकता है। बहरहाल, इमाम खामेनेई को किसी सुरक्षित ठिकाने पर भेज दिया गया है।
