मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : क्यों पिटे २२ अमीर अरब देश?

मुस्लिम वर्ल्ड : क्यों पिटे २२ अमीर अरब देश?

सूफी खान

बहरीन की वैâपिटल मनामा में ३३वीं बार पिछले साल जब अरब वर्ल्ड के लीडर जुटे थे, तो लगा कि ये लोग गाजा को बचा लेंगे। कुछ तो ऐसा करेंगे कि इजरायल की आक्रामकता बंद हो और फिलिस्तीन एक आजाद और खुदमुख्तार मुल्क बन जाए। इसकी वजूहात या कारण भी था वो ये कि फिलिस्तीन और गाजा के लिए जो लोग जुटे थे, वो कोई ऐसे-वैसे छोटे-मोटे मुल्क नहीं थे, बल्कि मुस्लिम दुनिया के वो अरबी देश थे, जो उसी खित्ते से आते हैं, जहां कभी भरा पूरा फिलिस्तीन हुआ करता था। इन हुक्मरानों के सामने ही वो फिलिस्तीन देखते ही देखते गाजा और वेस्ट बैंक तक सिमटकर रह गया। अरब लीग की पिछली समिट में ताकतवर और अमीर अरबी मुल्कों ने अपनी अरब लीग के जरिए हमास से अलग एक मजबूत फिलिस्तीन बनाने का सपना देखा था। लेकिन क्या एक साल बाद वो ये कह सकते हैं कि उन्होंने गाजा के लिए कुछ तो कदम उठाया। जवाब दुनिया जानती है सिफर या जीरो ही है।
एक संगठन है ओआईसी यानी ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन, जिसमें दुनिया के कुल ५७ मुस्लिम बहुसंख्या वाले और खुद को इस्लामी कहने वाले देश शामिल हैं। उससे हटकर अरब लीग, जिसे लीग ऑफ अरब स्टेट भी कहते हैं, ये संगठन अरबी बोलने वाले और अरबी कल्चर को जीने वाले देशों का समूह है। अरब लीग में आते हैं २२ मुल्क, जिनमें सऊदी अरब, बहरीन, कतर, कुवैत, जॉर्डन, अल्जीरिया, कोमोरोस, जिबूती, मिस्र, इराक, लेबनान, लीबिया, मॉरिटानिया, मोरक्को, ओमान, फिलिस्तीन, सोमालिया, सूडान, सीरिया, ट्यूनीशिया, यूनाइटेड अरब अमीरात और यमन शामिल हैं। खास बात यह है कि इसी अरब लीग का हिस्सा फिलिस्तीन भी है। अरब लीग और इसकी ताकत की बात करें तो ये ओआईसी से भी पॉवरफुल संगठन हैं। ओआईसी में भले ही ५७ मुस्लिम मुल्क हैं, लेकिन अरब लीग में २२ मजबूत और तेल की दौलत से मालामाल सिर्फ अरब देश है। इसका गठन २२ मार्च १९४५ को हुआ था। ये वो दौर था, जब अरब की धरती के हर मुल्क से तेल निकल रहा था। ये हिजाज से लेकर मश्रिके वुस्ता तक का पूरा इलाका था, जिसमें अरबी और सीमावर्ती अरबी बोलने वाले अप्रâीकी मुल्क शामिल थे।
अरब लीग का हेडक्वार्टर मिस्र की राजधानी काहिरा में बनाया गया। अरब लीग का मकसद है अपने मेंबर अरब मुल्कों के बीच एकता और सहयोग बढ़ाना, एक-दूसरे के हितों की रक्षा करना। अरब लीग की अपनी असेंबली है, जो बेहद ताकतवर मानी जाती है।
देखा जाए तो अपने ७५ साल के इतिहास में अरब लीग ने किसी बड़े कारनामें को अंजाम नहीं दिया। ४०० मिलियन अरबों की नुमाइंदगी करने वाली ये अरब लीग गाजा को तबाह होने से नहीं बचा पाई या यूं कहें कि गाजा को लुटते हुए चुपचाप देखती रही। गाजा पर इजरायली आक्रामकता शुरू होने के बाद अरब लीग के नुमाइंदे कई बार मिले, लेकिन न अरब लीग कभी इजरायल को आंख दिखा पाई, न हमले रोकने का प्रेशर ही बना पाई। आज फिलिस्तीन भूख से तड़प रहा है। वहां अकाल है, भुखमरी है, लेकिन अरब लीग सिर्फ प्रस्ताव बनाने और उन्हें पास करने में लगी है। तेल की ताकत भी अमेरिका और इजरायल को नहीं डिगा पाई। जिस अरब लीग के ज्यादातर देशों के पास दुनिया में सबसे ज्यादा तेल है, वो अगर अपनी कोई बात मनवाना चाहे तो क्या नहीं कर सकते थे, लेकिन इच्छाशक्ति की कमी और अपनी सत्ता को बचाए रखने के लिए अरब रूलर्स ने सरेंडर ही किया, वरना आज अरब लीग यूरोपीय यूनियन से कम ताकतवर नहीं होती।

अन्य समाचार