मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : क्यों जाएंगे दारुल उलूम देवबंद ...तालिबान विदेश मंत्री?

मुस्लिम वर्ल्ड : क्यों जाएंगे दारुल उलूम देवबंद …तालिबान विदेश मंत्री?

सूफी खान

भले ही भारत अब तक अफगानिस्तान में २०२१ से चल रहे तालिबान हुकूमत को मान्यता नहीं देता है, तस्लीम नहीं करता है, लेकिन फिर भी दोनों मुल्क एक-दूसरे से अंदर ही अंदर मजबूत ताल्लुकात बना चुके हैं। इसी की बानगी है कि तालिबान सरकार के फॉरेन मिनिस्टर आमिर खान मुत्तकी हिंदुस्थान पहुंचे हैं। यहां वो भारत के फॉरेन मिनिस्टर एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। उनके साथ तालिबान सरकार के पांच मेंबर का एक डेलिगेशन भी भारत आया है। अपने भारत दौरे के दौरान तालिबान विदेश मंत्री ताजमहल देखने तो जाएंगे ही जाएंगे, साथ ही यूपी के देवबंद में मौजूद दक्षिण एशिया के सबसे बड़े इस्लामिक शिक्षा केंद्र दारुल उलूम देवबंद का भी दौरा करेंगे। तालिबान सरकार के मिनिस्टर और डेलिगेशन का ताजमहल देखने जाना तो समझ आता है, लेकिन देवबंद क्यों? ये सवाल पैदा हो रहा है।
जानकार बताते हैं कि तालिबान के लोग हिंदुस्थान के प्रमुख इस्लामिक शिक्षा केंद्र दारुल उलूम देवबंद को बहुत सम्मान की नजर से देखते हैं। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इसी की तर्ज पर दारुल उलूम हक्कानिया मदरसा बनाया गया है। पाकिस्तान का ये सीमावर्ती इलाका अफगानिस्तान से लगता है और तालिबान के कई लीडर और विचारक यहीं से दीनी तालिम हासिल कर चुके हैं। इतना ही नहीं, देवबंद से प्रभावित दारुल उलूम हक्कानिया के फाउंडर मौलाना अब्दुल हक ने १९४७ से पहले हिंदुस्थान में दारुल उलूम देवबंद से ही अपनी पढ़ाई पूरी की थी। अब्दुल हक के बेटे समी उल हक को फादर ऑफ तालिबान कहा जाता है।

तो तालिबान का गहरा जुड़ाव है दारुल उलूम देवबंद से। यही वजह है कि तालिबानी विदेश मंत्री हिंदुस्थान में दारुल उलूम देवबंद का दौरा करेंगे। आमिर खान मुत्तकी ११ अक्टूबर को देवबंद पहुंचेंगे। मुत्तकी पांच मेंबर के डेलिगेशन के साथ नई दिल्ली आएंगे। इस डेलिगेशन में अफगानिस्तान के उद्योग और वाणिज्य उप मंत्री अहमदुल्लाह जाहिद, विदेश मंत्रालय के प्रथम राजनीतिक प्रभाग के महानिदेशक नूर अहमद नूर (जो दक्षिण एशिया मामलों को देखते हैं) और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जिया अहमद ताकल शामिल हैं।

साल २०२१ में अमेरिका समर्थक अशरफ गनी की सरकार का तख्तापलट कर तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता में वापस लौटा है। हालांकि, भारत समेत कई मुल्कों ने अब तक तालिबान को तस्लीम नहीं किया है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट बताती है कि पिछली सरकारों के दौर से भारत के जरिए अफगानिस्तान में कराए जा रहे विकास कामों को अफगानिस्तान ने कभी नहीं रोका, बल्कि इस पर सकारात्मक रुख ही दिखाया है। हिंदुस्थान अफगानिस्तान में सड़क, स्कूल, अस्पताल, पुल और बहुत से काम अंजाम दे रहा है। तालिबान सरकार ने भी इसमें इजाफा ही किया है। कहा जाता है कि अफगानिस्तान में तालिबान २.० इस बार पहले जैसा शिद्दत पसंद और जुल्म ओ जब्र करनेवाला नहीं है, बल्कि सबको साथ लेकर चलने में यकीन कर रहा है। यही वजह है कि पिछले चार सालों से अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।

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