हिमांशु राज
नाना पाटेकर सिर्फ परदे पर गहन किरदारों से असर नहीं छोड़ते, बल्कि असल जिंदगी में भी इंसानियत का उदाहरण पेश करते हैं। सोमवार को उन्होंने राजौरी और पुंछ के सीमावर्ती गांवों का रुख किया, जहां हाल ही में पाकिस्तानी गोलाबारी ने कई परिवारों को उजाड़ दिया था। यहां वे जब पीड़ितों से मिले तो उनकी आंखें नम हो गईं।
नाना ने बताया कि इन परिवारों के ज़ख्म सिर्फ उनके नहीं, बल्कि पूरे देश के हैं। अपने निर्मला गजानन फाउंडेशन के जरिए उन्होंने न सिर्फ 42 लाख रुपए की आर्थिक मदद सौंपी, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत की राहत सामग्री भी परिवारों तक पहुंचाई। यह मदद 117 प्रभावित परिवारों को दी गई, जो मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान की गोलीबारी से दहशत और नुकसान झेल रहे हैं।
नाना पाटेकर ने राहत बांटते हुए कहा कि यह कोई दान नहीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारी है। सेना के जवान और सीमावर्ती इलाके के लोग हर दिन देश की रक्षा का बोझ उठाते हैं, ऐसे में उनके दुख में साथ खड़ा होना उनका कर्तव्य है।यह दृश्य उस वक्त और भी भावुक हो उठा, जब गांव की महिलाओं ने नम आंखों से नाना को गले लगाया। उनके शब्दों में भरोसा था कि कलाकारों का असली सम्मान केवल तालियों की गूंज में नहीं, बल्कि लोगों के दर्द को कम करने में छुपा है।
